Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है यह बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के प्रदेश अध्यक्षों की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है. बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस की कमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी संभाले हुए हैं. दोनों नेता गांव-गांव जाकर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं.
दतिया का चुनावी रण गरमा चुका है
दतिया का चुनावी रण अब पूरी तरह गरमा चुका है. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने अपने सबसे बड़े प्रदेश चेहरे मैदान में उतार दिए हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार संगठन के साथ बैठकें कर रहे हैं, कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं और सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी लगातार जनसभाएं, पदयात्राएं और नुक्कड़ सभाएं कर सरकार को घेरने में जुटे हैं. पटवारी स्थानीय मुद्दों के साथ किसानों, युवाओं और बेरोजगारी को चुनाव का बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
स्टार प्रचारकों की फौज दतिया पहुंच रही
दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रदेश अध्यक्षों के लिए यह चुनाव संगठनात्मक नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. बीजेपी इस सीट को बरकरार रखकर अपना राजनीतिक दबदबा कायम रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे जीतकर प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश देना चाहती है. यही वजह है कि स्टार प्रचारकों की फौज भी दतिया पहुंच रही है. केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता लगातार प्रचार में जुटे हैं.
दतिया उपचुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया
दतिया उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक विधायक तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि प्रदेश में किस पार्टी का संगठन ज्यादा मजबूत है और किस प्रदेश अध्यक्ष की रणनीति ज्यादा कारगर साबित हुई. इसलिए दोनों दलों ने चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है.
दतिया की इस चुनावी जंग में मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस के संगठन, रणनीति और प्रदेश अध्यक्षों की साख का भी है. नतीजे यह तय करेंगे कि जनता ने किसकी रणनीति और किसके नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा जताया.
