मुरैना के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे! नदारद हैं टीचर, छात्र भी क्लास लेने नहीं पहुंचते
मुरैना में सरकारी स्कूलों में टीचर नहीं पहुंच रहे हैं.
Input- मनोज शर्मा
MP News: मुरैना के पहाड़गढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है. क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों में कहीं शिक्षक मौजूद मिले लेकिन छात्र नहीं पहुंचे, तो कहीं छात्र घंटों तक शिक्षकों का इंतजार करते रहे और कोई पढ़ाने नहीं आया. निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए.
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धोधा में सिर्फ एक शिक्षक मौजूद
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धोधा में निरीक्षण के दौरान सुबह 10:15 बजे केवल एक शिक्षक रामअवतार धाकड़ उपस्थित मिले. विद्यालय की प्राचार्य अर्चना गर्ग लंबे समय से अवकाश पर बताई गईं, जबकि सिसोदिया मैडम मेडिकल लीव पर हैं. विद्यालय में दर्ज छात्र संख्या 125 से अधिक है, लेकिन निरीक्षण के समय एक भी छात्र-छात्रा दिखाई नहीं दिए.
माध्यमिक विद्यालय धोधा में तीन में से सिर्फ एक शिक्षक मिला
सुबह 10:25 बजे शासकीय माध्यमिक विद्यालय धोधा में तीन शिक्षकों के पदस्थ होने के बावजूद केवल एक शिक्षक उपस्थित मिला. विद्यालय में करीब 170 छात्रों का नामांकन दर्ज है, लेकिन व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलीं.
देवरा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक मौजूद, छात्र नदारद
शासकीय प्राथमिक विद्यालय देवरा में दोनों शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन विद्यालय में एक भी छात्र मौजूद नहीं था. जबकि विद्यालय में 15 छात्रों का नामांकन दर्ज है. जडेरुआ माध्यमिक विद्यालय में छात्र इंतजार करते रहे, शिक्षक नहीं पहुंचे. सबसे चिंताजनक स्थिति शासकीय माध्यमिक विद्यालय जडेरुआ में देखने को मिली. यहां निरीक्षण के दौरान एक भी शिक्षक उपस्थित नहीं मिला, जबकि छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर में बैठी शिक्षकों का इंतजार कर रही थीं.
कक्षा 7 की छात्रा अंबिका राठौर ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से विद्यालय में बैठी है, लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई शिक्षक नहीं आया. छात्रा ने बताया कि एक अधिकारी कुछ देर के लिए आए थे और फिर चले गए. छात्र मनीष ने बताया कि सभी छात्र सुबह से स्कूल में बैठे थे, लेकिन कोई शिक्षक नहीं पहुंचा. मजबूरी में अब वे घर लौट रहे हैं. वहीं छात्र दीपक बघेल ने कहा कि कोचिंग के बाद सीधे स्कूल पहुंचे थे, लेकिन दो घंटे इंतजार करने के बावजूद कोई शिक्षक नहीं आया.
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
विद्यालयों की यह स्थिति बताती है कि क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी नहीं है. कहीं छात्र स्कूल नहीं पहुंच रहे तो कहीं शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों से दूर नजर आ रहे हैं. ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होना तय है.
बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूलों में शिक्षक और छात्र एक साथ मौजूद ही नहीं होंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना आखिर कैसे पूरा होगा? अब देखना होगा कि जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन इन मामलों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है.
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