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67 की उम्र में साइकिल से 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा पर निकले, पहला पड़ाव ओंकारेश्वर; चार धाम के भी करेंगे दर्शन

67-year-old Narendra Kasera set out on a journey to 12 Jyotirlingas on a bicycle.

67 साल के नरेंद्र कसेरा 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर साइकिल से निकले.

Input- घनश्याम माहिल्या

MP News: उम्र अक्सर लोगों के कदम रोक देती है, लेकिन इंदौर के आदर्श इंदिरा नगर निवासी 67 वर्षीय नरेंद्र कसेरा के लिए उम्र केवल एक संख्या है. उन्होंने अपनी साइकिल को ही जीवन का साथी बनाकर लगभग दो वर्ष की अखिल भारतीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है. उनके मन में न हजारों किलोमीटर लंबे सफर की चिंता है और न ही रास्ते की कठिनाइयों का डर, बल्कि एक ही लक्ष्य है, भगवान के पावन धामों के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभूति करना.

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहला पड़ाव

नरेंद्र कसेरा की इस अनूठी यात्रा का पहला पड़ाव भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जबकि समापन महाकाल की नगरी उज्जैन में होगा. यात्रा के दौरान वे देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ चारधाम, परली वैजनाथ, अयोध्या, जगन्नाथपुरी, तिरुपति बालाजी, पद्मनाभस्वामी मंदिर तथा नेपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों सहित अनेक पवित्र तीर्थों के दर्शन करेंगे.

यह उनकी दूसरी अखिल भारतीय साइकिल यात्रा है. इससे पहले मार्च 2024 में भी वे साइकिल से धार्मिक यात्रा पर निकले थे और लगभग 14 महीने बाद घर लौटे थे. उस अनुभव ने उनके विश्वास को और मजबूत किया.

पेट्रोल पंपों पर आराम करेंगे

हजारों किलोमीटर की इस यात्रा में वे जगह-जगह पर रुकते हुए जाते हैं. नरेंद्र बाबा ने बताया कि वे अधिकांश पेट्रोल पंपों, टोल प्लाजा, ढाबों, आश्रमों में विश्राम के लिए रुकते हैं. वे जहां भ रुकते हैं सबसे पहले उस जगह पर पूजा-अर्चना करते हैं. उनका संदेश है कि दृढ़ संकल्प, अटूट आस्था और ईश्वर में विश्वास हो तो उम्र कभी भी मंजिल की बाधा नहीं बनती.

‘कभी भी होटल और भोजन की चिंता नहीं रहती’

नरेंद्र कसेरा कहते हैं, ‘जब यात्रा भगवान शिव का स्मरण करके शुरू होती है, तब रास्ते की हर कठिनाई आसान हो जाती है. मुझे कभी होटल, भोजन या सुविधाओं की चिंता नहीं रहती. ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में हर व्यवस्था कर देते हैं.’

उनका मानना है कि यह यात्रा केवल तीर्थ दर्शन नहीं, बल्कि आत्मिक साधना, श्रद्धा और सनातन संस्कृति से जुड़ने का माध्यम है. 67 वर्ष की उम्र में साइकिल से निकला उनका यह संकल्प हर उस व्यक्ति को प्रेरित करता है, जो मानता है कि दृढ़ विश्वास और अटूट आस्था के सामने उम्र और दूरी दोनों छोटी पड़ जाती हैं.

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