Input- Sachin Rathod
Barwani: नीट परीक्षा में हुई विसंगतियों, पेपर लीक की खबरों और प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में सोमवार दोपहर को बड़वानी जिला मुख्यालय में छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया. सैकड़ों छात्रों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की.
कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे थे छात्र
प्रदर्शनकारी छात्र ज्ञापन देने कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे. जब नायब तहसीलदार सोनू गोयल ज्ञापन लेने बाहर आईं, तो छात्रों ने कलेक्टर से ही ज्ञापन लेने की मांग करते हुए कार्यालय के गेट पर धरना दे दिया. हाथों में तख्तियां लिए छात्रों ने “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” और “पेपर लीक बंद करो” के नारे लगाए. करीब आधे घंटे तक चले धरने के बाद छात्रों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा.
लाखों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर-बादल गिरासे
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष बादल गिरासे ने कहा कि देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर है. नीट देश की सबसे संवेदनशील परीक्षा है, जिससे भविष्य के डॉक्टर चुने जाते हैं. लेकिन पेपर लीक और परिणामों में विसंगतियों ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दिन-रात मेहनत करने वाले प्रतिभावान छात्र आज मानसिक तनाव और असुरक्षा के माहौल से गुजर रहे हैं.
उच्च स्तरीय जांच की मांग
छात्रा राधा सूर्यवंशी ने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की समयबद्ध और निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे दोषियों को कड़ी सजा मिल सके.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी है आंदोलन
छात्र योगेश ने बताया कि यह आंदोलन अब सिर्फ बड़वानी तक सीमित नहीं है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर अनशन कर रहे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में देशभर के छात्र लामबंद हो गए हैं. उन्होंने कहा कि हम दिल्ली नहीं जा सकते, लेकिन बड़वानी में प्रदर्शन कर हम उनका समर्थन करते हैं.
ज्ञापन में छात्रों ने तीसरी मांग पारदर्शी और फुलप्रूफ परीक्षा प्रणाली की रखी. छात्रों का कहना था कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो. छात्रों ने यह भी कहा कि युवाओं का संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना होगा.
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