Input- शेख शकील
MP News: देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से चतुर्थ ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक तीर्थ नगरी ओम्कारेश्वर में स्थित है. यहां मां नर्मदा के दक्षिणी तट पर विराजित भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रतिदिन देश दुनिया से आने वाले हजारों श्रद्धालु दर्शन, पूजन एवं नर्मदा स्नान के लिए श्रध्दा भाव से पहुंचते हैं. यहां जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं के सुलभ दर्शन और मंदिर की बेहतर व्यवस्था करने हेतु करीब एक साल पहले ट्रस्ट स्थापित किया था. इस ट्रस्ट के द्वारा यहां दान पत्र भी रखे गए थे, जिनमें श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुरूप राशि अर्पित करते हैं. हालांकि मिली जानकारी के अनुसार ट्रस्ट बनने के बाद से लेकर अब तक इन दान पेटियों में एकत्र हो रही राशि के संबंध में किसी भी तरह की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. इधर आयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में हुई कथित चंदा चोरी के बाद अब यहां भी ममलेश्वर मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता लाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व
ओम्कारेश्वर स्थित भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और भगावन ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व समान माना जाता है । इनका महत्व द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत में भी समान माना गया है । देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर श्रद्धापूर्वक दान अर्पित करते हैं । यहां ममलेश्वर मंदिर का संरक्षण एवं रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाता है । यही नहीं देवी अहिल्याबाई होलकर की परंपरा के अनुसार करीब 300 वर्षों से लगातार आज भी ममलेश्वर भगवान की तीनों समय की पूजा, आरती एवं धार्मिक व्यवस्थाओं का निर्वहन परम्परागत तरीके से किया जा रहा है ।
तत्कालीन SDM ने बनाया था ट्रस्ट
खंडवा जिला प्रशासन में फेरबदल होने के बाद जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पदभार ग्रहण करने के बाद यहां करीब एक वर्ष पूर्व तत्कालीन पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति को यहां ट्रस्ट निर्माण के निर्देश दिए थे. जिसके बाद उनके द्वारा ही ममलेश्वर मंदिर में दान पेटियां स्थापित कर मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया गया था. इसको लेकर प्रशासन के द्वारा बताया गया था कि श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि का उपयोग मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा.
प्रत्येक माह खुलती हैं दान पेटियां
हालांकि ट्रस्ट बनने के बाद से लेकर अब तक ट्रस्ट के ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया. इसको लेकर अब मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय संत समाज के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने भी दान राशि के आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि प्रत्येक माह दान पेटियां खोली जाती हैं, लेकिन अब तक यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई कि कुल कितनी राशि प्राप्त हुई, वह किस बैंक खाते में जमा की गई तथा उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया.
लेखा जोखा पारदर्शी करने की उठ रही मांग
वहीं तीर्थनगरी के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, तीर्थनगरी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. यही नहीं, यहां तीर्थ नगरी के धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ ही खंडवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह का भी मानना है कि, मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक रुपये का पारदर्शी लेखा-जोखा समय-समय पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए. इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होगी. वहीं ममलेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति सदस्य दूल्हे सिंह दरबार का भी कहना है कि, दान पेटियां प्रत्येक माह खोली जाती हैं, और चढ़ावे की राशि की जानकारी मौखिक रूप से दी जाती है. लेकिन कुल राशि, बैंक खाते, जमा प्रक्रिया और व्यय का विस्तृत विवरण समिति के सदस्यों को भी उपलब्ध नहीं कराया जाता. हालांकि मोबाइल पर एसएमएस आता है किसी माह 15 लाख किसी माह 16 लाख रु जमा हुए.
वहीं जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता के अनुसार बड़ी संख्या में ममलेश्वर जी के दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं के द्वारा प्रबंध समिति के दान पात्रों में दान राशि दी जाती है. जिसकी गणना प्रत्येक 15 दिनों में मजिस्ट्रेट के सामने वीडियो ग्राफी करते हुए होती है. जिसके बाद पूरी राशि समिति के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है. जिससे मंदिर कर्मचारियों की तनख्वाह और मंदिर परिसर में हो रहे विकास और विस्तार के कार्यों को कराया जा रहा है. यही नहीं सावन से पहले कई बड़े कार्य मंदिर परिसर में होने हैं. इसके साथ ही सिहस्थ को लेकर चल रहे विस्तार कार्यों को भी इसी धनराशि के माध्यम से कराया जा रहा है.
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