Indore: फर्जी बिल घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 92 करोड़ के घोटाले का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
इंदौर नगर निगम
इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ा शिकंजा कसा है. सोमवार देर रात ईडी ने इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड माने जा रहे पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद मंगलवार को तीनों को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूरी दे दी है.
92 करोड़ रुपए की हेराफेरी
सूत्रों के मुताबिक जांच में अब तक 92 करोड़ रुपए की हेराफेरी के पुख्ता सबूत सामने आ चुके हैं. हालांकि शुरुआती जांच में यह आंकड़ा 107 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी. ईडी ने पिछले साल 20 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी और 34 करोड़ रुपए की 43 संपत्तियां अटैच की थीं. इनमें मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की जमीनें, मकान और कृषि संपत्तियां शामिल हैं.
बेहद शातिर तरीके से दिया गया अंजाम
जांच एजेंसियों के मुताबिक पूरा घोटाला बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया गया. पुराने ड्रेनेज कार्यों को नया दिखाकर फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार किए गए. फर्जी मापन पुस्तिकाएं यानी एमबी बनाई गईं. अधिकारियों के आईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग कर भुगतान की फाइलें सिस्टम में अपलोड की गईं. इतना ही नहीं, बिना काम हुए ही तकनीकी मंजूरी और ऑडिट तक कर दिए गए और करोड़ों रुपए सीधे ठेकेदारों के खातों में पहुंचा दिए गए.
जांच के दौरान गायब मिलीं अहम फाइलें
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निगम की कई अहम फाइलें जांच के दौरान गायब मिलीं. जिन फाइलों की जांच हुई उनमें कई अधिकारियों के हस्ताक्षर तक मैच नहीं हुए. लेकिन सवाल अब भी कायम है कि आखिर अफसरों के ओरिजिनल लॉगिन आईडी और पासवर्ड घोटालेबाजों तक पहुंचे कैसे?
घोटाले की 186 संदिग्ध फाइलें जांच के दायरे में
बताया जा रहा है कि घोटाले की 186 संदिग्ध फाइलें जांच के दायरे में थीं. जिनमें से 80 फीसदी से ज्यादा फाइलों में गड़बड़ी मिली है.ड्रेनेज विभाग से लेकर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक करोड़ों रुपए के भुगतान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए. ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन से अफसर, कर्मचारी और ठेकेदार शामिल थे.
5 जून को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल इस हाई प्रोफाइल घोटाले की अगली सुनवाई 5 जून को होगी. “नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए की बंदरबाट कैसे हुई. किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चलता रहा और आखिर सिस्टम के अंदर बैठा वो कौन था जिसने सरकारी खजाने को खुला एटीएम बना दिया. इन सभी सवालों के जवाब अब ईडी की जांच से निकलकर सामने आ सकते हैं.”
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