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इंदौर नगर निगम की राजनीति में बड़ा उलटफेर, 4 बार के पार्षद चिंटू चौकसे ने अपने पद से इस्तीफा दिया

Congress leader Chintu Chouksey (File Photo)

कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे(File Photo)

MP News: इंदौर नगर निगम की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. नगर निगम चुनाव में अब महज करीब 8 महीने का समय बचा है और ऐसे वक्त में कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष के चेहरे में बड़ा बदलाव कर दिया है. चार बार के पार्षद और विधानसभा चुनाव लड़ चुके चिंटू चौकसे ने नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके स्थान पर कांग्रेस ने एससी वर्ग की महिला पार्षद सुनीला मिमरोट को नई नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है.

चिंटू के इस्तीफे के बाद सियासी बयानबाजी तेज

चिंटू चौकसे के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस तरह झूठ और भ्रम की राजनीति के जरिए शहर की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा था, कांग्रेस ने आखिरकार उसका संज्ञान लिया और नेतृत्व बदलने का फैसला किया. महापौर ने दावा किया कि कांग्रेस को देर से ही सही, यह समझ में आ गया कि इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली राजनीति जनता स्वीकार नहीं करेगी.

जीतू पटवारी को धन्यवाद, SC वर्ग की महिला को नेता प्रतिपक्ष बनाया

वहीं इस्तीफे के बाद भी चिंटू चौकसे पूरी तरह आक्रामक नजर आए. विस्तार न्यूज से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि वह प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने एक एससी वर्ग की महिला को नेता प्रतिपक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया है. उनके मुताबिक इंदौर में लगभग 5 लाख एससी मतदाता हैं और कांग्रेस समाज के हर वर्ग को नेतृत्व में भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक फैसला बताया.

‘सुनीला मिमरोट ने पार्टी के संघर्ष में सक्रिय भूमिका’

सीनियरिटी के सवाल पर चिंटू चौकसे ने कहा कि पहली बार या दूसरी बार पार्षद होना किसी की योग्यता का पैमाना नहीं होता. उन्होंने कहा कि सुनीला मिमरोट ने पिछले चार वर्षों में कांग्रेस की आवाज मजबूती से उठाई है और पार्टी के संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई है. भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए चौकसे ने पलटवार किया और कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा ने पहली बार के विधायक को मुख्यमंत्री बनाया और कई दल बदलकर आए नेताओं को मंत्री पद दिया, इसलिए कांग्रेस के फैसलों पर सवाल उठाना उचित नहीं है.

‘पार्टी ने भरोसा जताया है, उसपर खरा उतरुंगा’

नई नेता प्रतिपक्ष सुनीला मिमरोट ने भी जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और चिंटू चौकसे का आभार जताया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगी. मिमरोट ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है.

अब सवाल यह है कि नगर निगम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का यह बड़ा दांव कितना सफल साबित होगा. क्या एससी वर्ग और महिला नेतृत्व पर कांग्रेस का भरोसा उसे राजनीतिक बढ़त दिलाएगा, या भाजपा महापौर के आरोपों के जरिए इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएगी? फिलहाल इतना तय है कि चुनाव से पहले इंदौर की सियासत पूरी तरह गरमा चुकी है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक जंग और भी दिलचस्प होने वाली है.

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