MP News: इंदौर में करीब 15 साल पुराने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी दंपति दोषमुक्त करार दिए गए हैं. ईडी ने साल 2011 में बैंककर्मी राजेश नीम और उनकी पत्नी अंजना नीम के खिलाफ विशेष अदालत ने मामला दर्ज किया था. लेकिन ईडी की अटैच की गई लगभग 2.19 करोड़ की संपत्ति पर किसी ने दावा नहीं पेश किया.
शासन को संपत्ति जब्त करने का दिया आदेश
पूरा मामला साल 2011 का है. महू स्थिति सेंट्रेल बैंक में काम करने वाले कर्मचारी राजेश नीम और उनकी पत्नी के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में केस दर्ज किया था. इसके अलावा पुलिस ने भी मामला दर्ज किया था. पुलिस द्वारा रजिस्टर्ड केस में दोनों पहले ही बरी हो चुके थे. वहीं मनी लॉन्ड्रिंग केस में अब ईडी के न्यायाधीश राजेंद्र कुमार पाटीदार की विशेष अदालत ने बरी कर दिया. वहीं जब्त की गई संपत्ति को शासन को जब्त करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने कहा- मनी लॉन्ड्रिंग का मामला आगे चलाने का आधार नहीं
आरोपियों ने पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो केसों का उदाहरण दिया था. इनमें उन्होंने बताया था कि जब मूल केस में आरोपी बरी हो गए थे, तो मनी लॉन्ड्रिंग का केस उनके ऊपर से खत्म कर दिया गया था. आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना कि मूल केस में बरी होने के बाद फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में भी कोई याचिका नहीं दी गई. इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग का केस आगे चलाने का कोई आधार नहीं बनता है.
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