इंदौर में तीन साल की बच्ची अनिका शर्मा जिसने अभी तक ठीक से बोलना और चलना भी नहीं सीखा, आज जिंदगी और मौत की बीच जंग लड़ रही है. दरअसल अनिका को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी गंभीर जानलेवा बीमारी है. अनिका के स्वास्थ्य को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने गंभीर चिंता जताई. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान भी दिल्ली एम्स ने जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया.
दिल्ली एम्स को अल्टीमेटम
हाई कोर्ट ने दिल्ली एम्स को अल्टीमेटम देते हुए 23 तारीख तक हर हाल में जवाब देने के निर्देश दिए है. जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया कि अब इस मामले में और अधिक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा. अनिका की ओर से एडवोकेट चंचल गुप्ता और लखन शर्मा द्वारा दायर याचिका में बताया गया है कि बच्ची SMA टाइप-2 नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है.
इलाज के लिए 9.5 करोड़ रुपये की जरूरत
इस बीमारी के इलाज के लिए 9.5 करोड़ रुपये की जरुरत है. केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई 50 लाख की राशि के अलावा सामाजिक संगठनों और क्राउडफंडिंग के माध्यम से करीब 7.5 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिए है. इसके बावजूद भी इलाज अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. इसी संबंध में होई कोर्ट ने दिल्ली एम्स से जवाब मांगा है.
क्या है स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (SMA) बीमारी?
ये एक गंभीर, दुर्लभ और जानलेवा आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है, जो बच्चों के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) और मांसपेशियों को पूरी तरह से तबाह कर देती है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के शरीर में ‘एसएमएन-1’ जीन नहीं होता, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं.
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