रिपोर्ट- मनीष अरोडा
Indore News: मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य आलीराजपुर जिले में एक बार फिर कथित बंगाली झोलाछाप डॉक्टर के इलाज पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उमराली क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुमनियावाट की 23 वर्षीय गर्भवती महिला की उपचार के दौरान मौत हो जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भी नाराजगी है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार ग्राम सुमनियावाट निवासी भिन्टी पिता/पत्नी थानका, जो करीब 7 माह की गर्भवती थीं, की शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर एक कथित बंगाली डॉक्टर से उपचार कराया गया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने महिला को ड्रिप (बोतल) चढ़ाई और कुछ दवाइयां दीं। उपचार के कुछ ही देर बाद महिला की हालत अचानक गंभीर हो गई।
रास्ते में ही हुई महिला की मौत
स्थिति बिगड़ने पर परिजन तत्काल महिला को अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और उन्होंने उपचार में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।घटना की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर जिले में सक्रिय कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज किए जाने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। अब देखना होगा कि इस गंभीर घटना के बाद प्रशासन अवैध रूप से चिकित्सा करने वालों पर ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।
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