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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की कमीशन बढ़ाने की मांग, बड़वानी में कलेक्टर ऑफिस में जनसुनवाई में सौंपा ज्ञापन

Women from self-help groups submitted a memorandum in Barwani.

बड़वानी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने ज्ञापन सौपा.

Input- सचिन राठौर

MP News: बड़वानी में मंगलवार को जिलेभर के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं. उन्होंने जनसुनवाई में एक आवेदन सौंपा, जिसमें खाद्यान्न वितरण संचालकों के कमीशन में वृद्धि और अन्य सुविधाओं की मांग की गई. महिलाएं अपनी मशीनें लेकर प्रदर्शन करने पहुंची थीं.

राशन दुकान पर कमीशन 10 से 8 हजार किया गया

श्री आईजी स्वसहायता समूह, बिलवा रोड़ की अध्यक्ष रजनी आर्य ने बताया कि आजीविका मिशन के तहत उन्हें राशन दुकानें आवंटित की गई हैं. उनका आरोप है कि राशन दुकान पर मिलने वाला कमीशन लगातार कम किया जा रहा है. शुरुआत में उन्हें दस हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे अब घटाकर आठ हजार रुपये कर दिया गया है. भविष्य में कमीशन और कम करने की बात कही जा रही है.

‘कमीशन बढ़ाकर 25 हजार किया जाए’

समूह की महिलाओं की प्रमुख मांगों में खाद्यान्न वितरण संचालकों का कमीशन बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करना और 3,000 रुपये प्रतिमाह सहायक भत्ता प्रदान करना शामिल है. उन्होंने प्रत्येक समूह को स्थायी भवन या गोदाम उपलब्ध कराने और कमीशन राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की.

महिलाओं ने खाद्यान्न वितरण से संबंधित अन्य व्यावहारिक समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की अपील की. इसके अतिरिक्त, महिला स्वसहायता समूह खाद्यान्न वितरण संचालकों के हितों की रक्षा हेतु आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने की मांग की गई. उन्होंने यह भी कहा कि जिन दुकानों में कार्डधारकों की संख्या कम है, उनकी कमीशन राशि में भी उचित वृद्धि की जाए.

गंभीर बीमारी के लिए बीमा करवाने की मांग

एक अन्य महत्वपूर्ण मांग यह थी कि वर्तमान में समूह के खाते में जमा की जाने वाली कमीशन राशि को संबंधित विक्रेता के व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा किया जाए. इसके साथ ही, खाद्यान्न विक्रेताओं के लिए एक व्यापक बीमा योजना लागू करने की भी मांग की गई.

प्रस्तावित बीमा योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर उचित बीमा राशि, स्थायी या आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता, गंभीर बीमारी के उपचार हेतु स्वास्थ्य बीमा का लाभ और ड्यूटी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं एवं जोखिमों को भी शामिल करने की बात कही गई. समूह ने यह भी मांग की है कि बीमा का प्रीमियम पूर्णतः या आंशिक रूप से शासन द्वारा वहन किया जाए, क्योंकि खाद्यान्न विक्रेता सार्वजनिक वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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