Jabalpur: जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव पहुंचे. सीएम मोहन यादव ने ऐलान किया है कि अब से जबलपुर एयरपोर्ट को रानी दुर्गावती एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने न केवल अकबर की सेना को तीन बार परास्त किया अपितु सुशासन और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी कई नवाचार करते हुए क्षेत्र को जनोन्मुखी शासन व्यवस्था प्रदान की.
बता दें कि लंबे समय से जबलपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर वीरांगना रानी दुर्गावती करने की मांग की जा रही है. PWD मंत्री राकेश सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस संबंध में पत्र सौंपा और प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह किया थी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए केंद्र सरकार से चर्चा कर जल्द निर्णय करने भरोसा दिलाया था.
कौन थीं रानी दुर्गावती?
वीरांगना रानी दुर्गावती केवल एक पराक्रमी योद्धा ही नहीं थीं, बल्कि उनका जल प्रबंधन और कृषि प्रबंधन आज के वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित करता है. 52 गढ़ों की साम्राज्ञी, जिन्होंने मात्र 41 वर्ष की आयु में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय हासिल की. उनका साम्राज्य मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक विस्तृत था. वे नारी शक्ति की प्रत्यक्ष प्रतीक रही हैं.
कालिंजर में हुआ था जन्म
रानी दुर्वावती का जन्म बांदा जिले के प्रसिद्ध कालिंजर किले में हुआ था. उनके पिता चंदेल वंश के राजपूत राजा कीर्तिसिहं चंदेल थे. दुर्गावती का विवाह 1542 में गोंड वंश के राजा दलपत शाह के साथ हुआ था. पति की असामयिक मृत्यु के बाद, उन्होंने गोंडवाना (गढ़-मंडला) की बागडोर संभाली और अपनी वीरता और कुशल प्रशासन के लिए इतिहास में अमर हो गईं. वीरांगना रानी दुर्गावती का साम्राज्य गोंडवाना के नाम से जाना जाता था, जिसका मुख्य केंद्र वर्तमान मध्य प्रदेश का जबलपुर (जिसे ऐतिहासिक रूप से गढ़ा-मंडला कहा जाता था) है.
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