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Success Story: दिव्यांगता शारीरिक कमजोरी है, दिमाग की नहीं, 80% दिव्यांग हिमांशु सोनी बने अपने ही जिले के डिप्टी कलेक्टर

Himanshu Soni

डिप्टी कलेक्टर हिमांशु सोनी

Success Story: दिव्यंगिता शारीरिक कमजोरी का प्रतीक हो सकती है लेकिन मानसिक मजबूती आपकी इच्छा शक्ति से ही आती है. जबलपुर के हिमांशु सोनी शरीर से करीब 80% दिव्यांग होने के बावजूद भी अपने ही शहर में डिप्टी कलेक्टर बन गए हैं. जबलपुर निवासी हिमांशु सोनी ने 2024 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर बने है. शरीरिक रूप से अक्षम हिमांशु जब कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें हर कोई देखता रह गया. जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने हिमांशु सोनी का स्वागत किया और उनकी जबलपुर जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात कराई.

अपने ही जिले में हुई पोस्टिंग

जबलपुर के अधारताल में रहने वाले हिमांशु को अब काम करने के लिए उनका गृह जिला ही मिला है. पिता महेश कुमार सोनी सेवानिवृत्त शिक्षक हैं.उनका कहना था कि हिमांशु के जन्म के समय से ही चुनौतियां शुरू हो गई थीं. उनका शरीर पूरी तरह से गोल था और हाथ-पैर भी दिखाई नहीं देते थे. पिता ने हार नहीं मानी और दिन-रात मालिश करके उनके शरीर को सही आकार दिया.

मेहनत और दृढ़ संकल्प के बदौलत हिमांशु ने कर दिखाया

करीब 78% अस्थि बाधित और 20% दृष्टिबाधित होने के बावजूद हिमांशु न मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर 13वीं रैंक हासिल की, और बन गए डिप्टी कलेक्टर. उन्होंने दिव्यांग कोटे में पहला स्थान प्राप्त कर साबित कर दिया कि हौसलों की उड़ान भरने के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं होती.

हिमांशु कहते हैं कि उन्होंने बचपन से ही बेहद संघर्ष देखा है शारीरिक तौर पर कमजोर होने के साथ ही आर्थिक तौर पर भी बेहद कमजोर लेकिन पिता की दिन-रात की मेहनत और कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश नहीं उन्हें हमेशा कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया.

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