Vistaar NEWS

एमपी की वो वीरांगना, जिसने अंग्रेजों को दी खुली चुनौती और देश के लिए हंसते-हंसते दे दी जान, जानिए अवंतीबाई लोधी की कहानी

Ramgarh Queen Avantibai Lodhi

अमर शहीद वीरांगना रानी अवंति बाई लोधी

इनपुट- अनिल साहू

Independence Day 2026: देशभर में आज 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. ऐसे में हम आपको एक ऐसी क्रांतिकारी की कहानी बताने जा रहे है, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ जमकर आजादी की लड़ाई लड़ी. उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेजी हूकूमत के किलाफ युद्ध लड़ा लेकिन अंत में वह वीरगति को प्राप्त हुई है. आइए इस आजादी के उतस्व के मौके पर ऐसी वीरांगना को नमन करते हुए उनके कहानी के बारे में जानते हैं.

वीरांगना रानी अवंति बाई लोधी

1857 की क्रांति की अमर शहीद वीरांगना रानी अवंति बाई लोधी ने रामगढ़ रियासत से अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी थी. मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने अंतिम सांस तक वीरतापूर्वक युद्ध किया. जब अंतिम रण में अंग्रेजी सेना ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया, तब रानी ने पराधीनता स्वीकार करने के बजाय अपनी कटार से स्वयं को वीरगति देकर स्वतंत्रता और स्वाभिमान की मिसाल कायम की.

जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर

डिंडोरी जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर बालपुर गांव का वही ऐतिहासिक स्थल आज भी उनके अद्वितीय बलिदान का साक्षी है. इसी पावन भूमि पर रानी अवंति बाई ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. उनके सम्मान में यहाँ भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है और एक संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जहाँ उनके शौर्य, संघर्ष और बलिदान की गाथा आज भी जीवंत है.

हर वर्ष 16 अगस्त को रानी अवंति बाई की जयंती और 20 मार्च को उनका बलिदान दिवस पूरे श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति के साथ मनाया जाता है. यह स्थल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रेरणा है.

ये भी पढ़ेंः ‘तेल-गैस के नाम पर लोगों को डराया…’, US-Iran जंग के बीच पीएम मोदी का बयान

Exit mobile version