इनपुट-विवेक तिवारी
Rewa: महाराष्ट्र के सतारा से रीवा के 10 आदिवासी बच्चों को रेस्क्यू किया गया है. ये सभी बच्चे रीवा जिले के सोहागी थाना अंतर्गत बड़ागांव के रहने हैं. फिलहाल बच्चों को रेस्क्यू करके सतारा थाने में ही रखा गया है. जानकारी के मुताबिक इन सभी बच्चों को काम दिलाने के बहाने रीवा से सतारा लाया गया था. पुलिस ने मामला दर्ज का आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.
बच्चों ने कलेक्टर को लगा दिया फोन
इन बच्चों को ब्रजेश पाल नाम का व्यक्ति महाराष्ट्र लेकर गया था और सतारा जिले की खंडाला तहसील में पहले बंधक बनाकर रखा गया था. बंधक बच्चों को आरोपी ने डरा-धमकाकर रखा था और किसी को भी फोन करने, भागने की कोशिश करने से मना किया था. लेकिन बच्चों ने चालाकी से किसी तरह रीवा कलेक्टर को फोन मिला दिया.
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सतारा के लिए टीम रवाना
फिर क्या था जैसे ही रीवा कलेक्टर को इसके बारे में पता चला प्रशासन पूरी तरह से एक्टिव हो गया. कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने एक टीम बच्चों को बचाने के लिए रवाना की. फिलहात सभी बच्चों का रेस्क्यू किया जा चुका हैं और वे सतारा थाने में एकदम सुरक्षित है. जानकारी के मुताबिक, इन नाबालिग बच्चों को बेहतर काम और पैसों का लालच देकर सतारा ले जाया गया था, जहाँ उनसे बंधुआ मजदूर के रूप में अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था.
इन बच्चों को किया गया रेस्क्यू
विनीत साहू, विनोद साहू (22), अनेक साहू, अमन तिवारी (16), विनय आदिवासी (22), गीत साहू (22), अमित आदिवासी (16), सत्यवान आदिवासी (16), सुनीता साहू और दीपक साहू
पुलिस ने इस मामले में मानव तस्करी, बाल श्रम निषेध कानून और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच और आरोपियों की धरपकड़ तेज कर दी है. बच्चो से पूछताछ के बाद उन्हें वापस रीवा भेजने की तैयारी की जा रही है.
