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‘मेरी जमीन बचा लो… नहीं तो हमें जिंदा गाड़ देंगे!’, मऊगंज में दलित महिला की पुकार

A Dalit woman plea in Mauganj

मऊगंज में दलित महिला ने जमीन के लिए लगाई न्याय की गुहार

MP News: मऊगंज जिले के लौर खुर्द गांव से सामने आया एक मामला सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. अनुसूचित जाति (कुम्हार) समुदाय की एक महिला ने गांव के कुछ लोगों पर सरकारी पट्टे की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा करने की कोशिश, मारपीट, जातिसूचक गालियां देने, अश्लील गाली-गलौज करने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता का कहना है कि आज उनका परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है तथा उन्हें हर पल किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है.

आवंटित जमीन पर मूर्ति स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद!

शिकायतकर्ता चंद्रवती प्रजापति के अनुसार, 11 जुलाई 2026 की सुबह कुछ लोग उनके परिवार को शासन द्वारा आवंटित भूमि पर हनुमान जी की प्रतिमा लेकर पहुंचे और कथित रूप से वहां प्रतिमा स्थापित करने लगे. जब उन्होंने और उनकी सास ने इसका विरोध किया तो आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई, जातिसूचक शब्द कहे गए और अश्लील गालियां दी गईं. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध जारी रखने पर उन्हें उसी जमीन में जिंदा गाड़ देने की धमकी दी गई.

दिव्यांग बेटे को लेकर भी कथित रूप से डराने का आरोप!

पीड़िता ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि घटना के दौरान उनके 10 वर्षीय दिव्यांग पुत्र को लेकर भी भय पैदा करने वाली बातें कही गईं. उनका कहना है कि घटना के बाद से उनका बच्चा और पूरा परिवार मानसिक तनाव में है तथा घर के बाहर निकलने तक में डर महसूस करता है.

लौर थाने गए… लेकिन नहीं मिली न्याय की उम्मीद!

पीड़िता का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद वह थाना लौर पहुंचीं और पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. उनका यह भी कहना है कि पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया. स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक मऊगंज तथा पुलिस महानिरीक्षक रीवा को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की.

शिकायत देने के बाद भी कथित रूप से मिली धमकी

चंद्रवती प्रजापति का आरोप है कि उच्च अधिकारियों को शिकायत देने के बाद जब वे वापस लौट रही थीं, तब रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोककर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला और भी गंभीर माना जा सकता है.

आवंटित सरकारी पट्टे की भूमि पर कब्जे का विवाद

पीड़िता ने अपने आवेदन में दावा किया है कि उनके ससुर को वर्ष 2002-03 में मध्य प्रदेश शासन द्वारा कई खसरा नंबरों की भूमि विधिवत आवंटित की गई थी तथा उन्हें ऋण पुस्तिका भी प्रदान की गई थी. उनका आरोप है कि कुछ लोग उसी भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और राजस्व अभिलेखों में भी कथित अनियमितता हुई है, जिसकी जांच संबंधित विभाग द्वारा की जा रही है.

मिल रही धमकियां,डर के साए में जी रहा पूरा परिवार.

पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही कथित धमकियों के कारण वे भय के माहौल में जीवन बिता रहे हैं. परिवार को आशंका है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो उनके साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है. उन्होंने प्रशासन से जान-माल की सुरक्षा, भूमि की रक्षा तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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प्रशासन से प्रमुख मांगें

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा शासन द्वारा आवंटित भूमि को अवैध कब्जे से बचाया जाए. साथ ही उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की भी मांग की है.

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