Input- Kailash lalwani
Shahdol: कहते हैं ‘एमपी अजब है, सबसे गजब है’, लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है, उसने मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है. यह किसी बॉलीवुड थ्रिलर या ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ फिल्म से भी दो कदम आगे की कहानी है. यहाँ एक चाचा ने परीक्षा में फर्जीवाड़ा नहीं किया, बल्कि सीधे सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की कुर्सी ही हथिया ली. अपने सगे भतीजे के असली डॉक्टर होने के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर यह फर्जी डॉक्टर सालों तक मध्य प्रदेश के तीन-तीन जिलों से एक साथ सरकारी सैलरी डकारता रहा.
लोकायुक्त के जाल में फंसा ‘फर्जी डॉक्टर’
इस फिल्मी जालसाजी का भंडाफोड़ तब हुआ जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने शहडोल जिले के जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम उफ़री के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा. लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद जब जांच की परतें खुलीं, तो अधिकारियों के होश उड़ गए. जिस शख्स को अब तक सिस्टम ‘डॉ. महेश चंद्र शर्मा’ समझकर सैलरी दे रहा था, वह असल में डॉक्टर था ही नहीं!
सोशल मीडिया पर खबर देख असली डॉक्टर के उड़े होश
मामले में असली यू-टर्न तब आया जब राजस्थान के भरतपुर (गांधी नगर) निवासी असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा स्वयं शहडोल पहुंचे. उन्होंने जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वह पिछले चार-पांच वर्षों से राजस्थान के डीग जिले के पूछरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में असली मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. हाल ही में जब उन्होंने सोशल मीडिया और समाचारों में लोकायुक्त की कार्रवाई और अपनी ही तस्वीर-नाम देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. उन्हें पता चला कि मध्य प्रदेश में कोई उनकी पहचान पर डॉक्टर बनकर बैठा है.
चाचा का ‘मास्टरमाइंड’ खेल: भतीजे की डिग्री, अपना आधार!
असली डॉक्टर की शिकायत के मुताबिक, उनके रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा ने इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया. शातिर चाचा ने भतीजे के सारे शैक्षणिक दस्तावेजों और फोटो का दुरुपयोग किया और पहचान के लिए [Aadhaar Redacted] का इस्तेमाल किया. इसी फर्जीवाड़े के दम पर वह मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की आंखों में धूल झोंककर मेडिकल ऑफिसर बन बैठा. हद तो यह है कि चाचा ने अपने परिवार तक को अंधेरे में रखा था और उन्हें बता रखा था कि वह कोटा में कोचिंग चलाने का काम करते हैं.
एक ‘मुन्ना भाई’, तीन जिले और तीन-तीन सैलरी!
लोकायुक्त की जांच में जो सबसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ, वह यह कि इस फर्जी डॉक्टर की एक साथ तीन जिलों शहडोल, श्योपुर और खरगोन में पदस्थापना दर्ज थी. रिकॉर्ड के अनुसार, वह फरवरी 2023 से खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक में भी पदस्थ था. अब सबसे बड़ा रहस्य यह है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित तीन अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर यह ‘मुन्ना भाई’ पूर्णकालिक सेवाएं कैसे दे रहा था और तीन जगह से सरकारी खजाना कैसे लूट रहा था?
प्रशासनिक लचरता पर बड़े सवाल
इस महाघोटाले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (BMOS) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं. क्या विभाग में बिना वेरिफिकेशन के ही नौकरियां बांटी जा रही थीं, या फिर इस खेल में विभाग के ही कुछ बड़े मगरमच्छ शामिल थे?
पुलिस ने की कार्रवाई शुरू
जयसिंहनगर थाना प्रभारी अजय बैगा ने पुष्टि की है कि राजस्थान से आए असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है. अब जांच इस बात की हो रही है कि इस बहु-पदस्थापना और फर्जी नियुक्ति के पीछे स्वास्थ्य विभाग के कौन-से अधिकारी शामिल थे और सरकारी खजाने को कितने करोड़ का चूना लगाया गया है. इसे प्रदेश के स्वास्थ्य इतिहास का सबसे अनोखा और बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है.
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