Simhastha Preparation Engineering Lapse: मध्य प्रदेश अजब है, सबसे गजब है. ये लाइन आपने कई बार सुनी होगी और कई बार कई जगहों पर पढ़ी होगी. यह बात इसलिए भी कही जाती है क्योंकि मध्य प्रदेश में जैसे कारनामे होते हैं. शायद ही देश के किसी अन्य राज्य में होते हैं. कभी 90 डिग्री पुल बनाकर नई मिसाल पेश की जाती है तो कभी खराब सड़कों की तुलना अमेरिका से कर दी जाती है. इसके बाद भी सुधार के नाम पर केवल और केवल बातें ही होती हैं. अब ताजा मामला उज्जैन शहर से सामने आया है. जहां पुल बना रहे इंजीनियर ही रास्ता भूल गए. उन्होंने सड़क की जगह पुल को खेत में उतार दिया.
उज्जैन में इस समय साल 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां चल रही हैं. इसके तहत नई सड़के-पुल-इमारतें बनाई जा रही हैं. लेकिन, इसी में इंजीनियरों ने कारनामा कर दिया. इंदौर से आने वाले वाहनों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए पुल बन रहा था.
पुल और सड़क के बीच 30 डिग्री का अंतर
पुल बन भी गया तब तक यह पता नहीं चला कि पुल सामने वाली सड़क से मिल रहा है या नहीं? मतलब यह कि इंजीनियरों ने ऐसा पुल बनाया कि जो सड़क के बजाय खेत में यात्रियों को उतारेगा. दोनों में करीब 30 डिग्री का अंतर है.
अब गलती सुधारने के लिए अतिरिक्त जमीन लेकर सड़क को मोड़कर ब्रिज से मिलाने की तैयारी है. किसान इसका विरोध कर रहे हैं. कुल मिलाकर चिराग तले अंधेरा वाली सीन उज्जैन में हो गया. अब देखना होगा कि सरकार और इंजीनियर पुल को सीधा कर पाने में सफल होते हैं या नहीं.
23 करोड़ में सड़क बना रहा नगर निगम
नगर निगम की तरफ से पूरी सड़क ठेका लिया गया है, जिसकी कीमत 23.26 करोड़ है. जबकि ₹13.38 करोड़ के ब्रिज का जिम्मा सेतु विभाग के पास है. नगर निगम भी गड़बड़ी सुधारने के लिए सेतु विभाग को पत्र लिख चुका है. इस मामले में जब अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ब्रिज वैसा ही बन रहा है, जैसा बनना चाहिए। गड़बड़ी कहां हुई, यह नगर निगम बताए.
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