MP News: उज्जैन में सावन की तीसरी सवारी पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. तीसरी सवारी पर नागपंचमी भी पड़ रही है. ऐसा संयोग 7 साल बाद बन रहा है. इसके पहले साल 2019 में ऐसा हुआ था जब तीसरी सवारी और नागपंचमी एक साथ पड़े थे. ऐसे में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. अनुमान के मुताबिक 8 से 10 लाख श्रद्धालु सावन पर पहुंचेंगे.
24 घंटे के लिए नागचंद्रेश्वर के पट खुलेंगे
नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार नागपंचमी के दिन खुलते हैं. 24 घंटे के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं. सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी मनाई जाती है. मंदिर प्रशासन समिति ने बताया है कि सोमवार को 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसके कारण विशेष इंतजाम किए गए हैं. दर्शन के लिए अलग और भीड़ को मैनेज करने के लिए अलग तरीके से तैयारी की जाएगी. आज एक मीटिंग की जा रहा है, जिसमें मंदिर समिति के सदस्य, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी शामिल होंगे. जिससे कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की कोई परेशानी ना हो सके.
11वीं शताब्दी में रखी गई थी नागचंद्रेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा को दुर्लभ माना जाता है. इतिहास के जानकारों के मुताबिक 11वीं शताब्दी में मंदिर में नागचेंद्रेश्वर की इस दुर्लभ प्रतिमा को रखा गया था. इसमें फन फैलाए शेष नाग हैं और उनके नीचे भगवान शंकर और माता पार्वती विराजमान हैं. हर साल सिर्फ एक दिन के लिए मंदिर के पट खोले जाते हैं, जिसके कारण भगवान के दर्शन को विशेष माना जाता है.
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