Vistaar NEWS

CWG 2026: कौन हैं गाजियाबाद में तैनात सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे? जूडो में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास

Asmita Dey

अस्मिता डे (Photo-PTI)

Asmita Dey: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. महिलाओं के 48kg वर्ग के फाइनल में उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी हेडी क्वाच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसी के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं.

कौन हैं अस्मिता डे?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचने वाली अस्मिता डे का जन्म 22 मार्च, 2003 को हुआ था. वह मूल रूप से त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के एक छोटे से कस्बे बेलोनिया की रहने वाली हैं. उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत 800 मीटर धावक के रूप में की थी. अस्मिता एथलेटिक्स में अच्छी थीं और वह जिला स्तरीय ट्रायल्स तक पहुंची थीं. यहीं से उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया.

इस ट्रायल्स में एक कोच ने उनके लचीलेपन, ताकत और फुर्ती को पहचाना और उन्हें जूडो मैट का रुख करने की सलाह दी. घरेलू स्तर पर स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया सर्किट में शानदार प्रदर्शन के बाद साल 2018 में उन्हें भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने अपने विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम में शामिल कर लिया. जहां उन्होंने दिग्गज जूडो कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा.

यह भी पढ़ें: CWG 2026: कौन हैं मध्य प्रदेश की यामिनी मौर्या? जिन्होंने जूडो में जीता सिल्वर

उत्तर प्रदेश पुलिस में हैं सब-इंस्पेक्टर

कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट अस्मिता डे उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद में तैनात हैं और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग गाजियाबाद में है. वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें बधाई दी है. सीएम योगी ने कहा कि देश कि बेटियों के अदम्य साहस, अनुशासन, संकल्प और परिश्रम की प्रतीक इस स्वर्णिम उपलब्धि पर प्रत्येक भारत वासी को गर्व है.

पिता के निधन से टूट चुकी थी अस्मिता

अस्मिता के दिवंगत पिता अर्जुन डे साइकिल ठीक करने की एक छोटी सी दुकान चलाते थे. महज 7 महीने पहले दिसंबर 2025 में उनके पिता का ब्रेन स्ट्रोक के कारण निधन हो गया था. पिता के निधन के बाद अस्मिता पूरी तरह टूट गई थीं और उन्होंने खेल छोड़ने का मन बना लिया था. हालांकि उनके परिवार, कोच और साथियों ने उन्हें हार नहीं मानने दी.

Exit mobile version