सुजीत कलकल ने आइची-नागोया Asian Games 2026 में पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में इतिहास रचते हुए भारत को कुश्ती का पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाया है. ये मैच शुक्रवार 2 अक्टूबर को खेला गया. उन्होंने एक ऐसे मैच में गोल्ड मेडल जीता जिसमें लगभग जीत की उम्मीद खत्म होती दिख रही थी. इस मैच में सुजीत एक समय 2-9 से पीछे चल रहे थे. लेकिन उन्होंने आखिरी पलों में जबरदस्त वापसी करते हुए ताजिकिस्तान के वर्ल्ड मेडलिस्ट पहलवान अब्दुलमजीद कुडिएव को 10-9 से मात दे दी और गोल्ड मेडल अपने नाम किया.
इमलौता गांव में हुआ जन्म
पहलवान सुजीत कलकल का जन्म 5 नवंबर 2002 को हरियाणा के चरखी दादरी के इमलौता गांव में हुआ था. सुजीत को बचपन से ही रेसलिंग में अपना करियर बनाना था, इसी वजह से उन्होंने पढ़ाई-लिखाई में बेहतर होने के बाद भी रेसलिंग को अपना भविष्य चुना. सुजीत ने 12वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. घरवालों को सुजीत का स्कोर देखकर लगा कि बच्चा पढ़ने में होशियार है तो इंजीनियरिंग करेगा, JEE की तैयारी करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
सुजीत पहले ही पहलवानी को ही अपना करियर मान चुके थे. हालांकि सुजीत के घरवालों से उनको पूरा सपोर्ट मिला और आज सुजीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर खुद को साबित भी कर दिखाया.
🥇 GOLD FOR SUJEET KALKAL! 🇮🇳🔥 Sujeet defeats Tajikistan’s Abdulmazhid Kudiev 10–9 in the Men’s Freestyle 65 KG final to win gold at Aichi-Nagoya 2026! 🤼♂️🥇 https://t.co/0YzVJgxBdb
— Wrestling Federation of India (WFI) (@wfi_wrestling) October 2, 2026
सुजीत कलकल की उपलब्धि
एशियन गेम्स से पहले सुजीत कलकल ने सबसे बड़ी उपलब्धि पिछले साल अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में हासिल की थी. सुजीत ने फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग में उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को 10-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. इससे पहले सुजीत ने कोई विश्व खिताब नहीं जीता था. हालांकि उन्होंने दो अंडर-23 एशियाई खिताब (2022, 2025) और एक अंडर-20 एशियाई चैम्पियनशिप स्वर्ण (2022) जीता था.
जब पिता बने कोच तो निखरी काबिलियत
सुजीत की कहानी का एक खास पहलू उनके पिता दयानंद कलकल का उनके करियर में योगदान है. पिता ने उन्हें बचपन से ही कुश्ती की बारीकियां सिखाईं और उनकी ट्रेनिंग पर काम किया. सुजीत ने अपनी ताकत के साथ तकनीकी खेल पर भी लगातार मेहनत की. मैट पर उनकी रक्षात्मक शैली और सही समय पर काउंटर अटैक करने की क्षमता उनकी पहचान बनी.
