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पासवर्ड को कहें अलविदा! गूगल-माइक्रोसॉफ्ट ला रहे हैं Passkeys, जानें कैसे करेगा काम

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PassKeys: क्या आपको दर्जनों पासवर्ड याद रखने में परेशानी होती है? क्या आप हर बार ‘Forgot Password’ पर क्लिक करके परेशान हो चुके हैं? अगर हाँ, तो आपके लिए अच्छी खबर है. दिग्गज टेक कंपनियां अब ‘पासवर्ड-लेस’ (Passwordless) भविष्य की ओर बढ़ रही हैं. लेकिन, भारत की डिजिटल विविधता और हार्डवेयर सीमाओं के कारण यह ‘खेल’ यहां थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

क्या है पास्की तकनीक?

पास्की एक नई डिजिटल पहचान है जो आपके डिवाइस (फोन या लैपटॉप) पर आधारित होती है. यह पारंपरिक पासवर्ड की जगह आपके डिवाइस के बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) या स्क्रीन लॉक पिन का उपयोग करती है. FIDEO अलायंस के मुताबिक, पिछले दो सालों में पासकी सपोर्ट करने वाले अकाउंट्स की संख्या अरबों तक पहुँच चुकी है. यह सिस्टम पूरी तरह से आपके डिवाइस और बायोमेट्रिक्स पर आधारित होता है.

जब आप किसी वेबसाइट पर पास्की सेट करते हैं, तो दो कीज बनती हैं—एक सार्वजनिक जो वेबसाइट के पास रहती है और एक निजी जो आपके फोन में सुरक्षित रहती है. लॉगिन करते समय वेबसाइट आपके फोन को सिग्नल भेजती है, और आप अपने फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से उसे ‘अनलॉक’ कर देते हैं. आपको कुछ भी टाइप करने की जरूरत नहीं होती.

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भारत में क्यों फंस सकता है खेल?

पुराने हार्डवेयर और ‘लिगेसी’ डिवाइसेस पास्की तकनीक के लिए स्मार्टफोन या पीसी में विशेष सुरक्षा चिप्स और आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है. भारत में आज भी एक बड़ा वर्ग पुराने बजट स्मार्टफोन्स का उपयोग कर रहा है जो इस तकनीक को पूरी तरह सपोर्ट नहीं करते. भारत के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में आज भी एक ही स्मार्टफोन का उपयोग पूरा परिवार करता है. जिसमें पास्की कारगर नहीं हो सकता.

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