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MLC चुनावों में BJP जीती फिर क्यों बढ़ी टेंशन, क्या आगरा-लखनऊ की ‘सेंधमारी’ का विधानसभा चुनाव में दिखेगा असर?

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अखिलेश यादव और सीएम योगी

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है. उससे पहले हाल ही में यूपी में शिक्षक और स्नातक कोटे के एमएलसी चुनाव संपन्न हुए. इनके नतीजें भी सामने आ चुके है, जिनमें भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीत चुकी है. वहीं समाजवादी पार्टी ने भी 5 सीटों पर जीत दर्ज की है. इन 11 सीटों में 5 स्नातक (Graduates) कोटे की और 6 शिक्षक (Teachers) कोटे की सीटें शामिल थीं. लेकिन 6 सीटें जीतने के बाद भी भाजपा को टेंशन बढ़ी हुई है.

क्या है वजह?

इसकी वजह है कि भाजपा को इस चुनाव में दो बड़े झटके लगे हैं. पहला झटका यह कि लखनऊ की स्नातक सीट बीजेपी हार गई, जो पहले उसके पास थी. कांति सिंह पटेल ने बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह को हरा दिया है. दूसरा झटका वाराणसी सीट से लगा है. यहां शिक्षक सीट पर सपा चुनाव जीत चुकी है. यहाँ से सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की है. उन्होंने भाजपा के डॉ. प्रमोद मिश्रा को हराया.

वहीं वाराणसी खंड स्नातक सीट पर भी समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की है. इस जीत के बाद भाजपा में चिंता की लहर दौड़ गई है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि समाजवादी पार्टी वहां जीत गई, जहां उन्हें नहीं जीतना चाहिए था. हम इस चुनाव की समीक्षा करेंगे; यानी बीजेपी को ये मालूम है कि इस चुनाव से उन्हें कितना बड़ा झटका लगा है.

सपा ने 2020 में जीती थी मात्र 3 सीटें

वहीं सपा की बात करें तो सपा 2020 के एमएलसी चुनाव में 3 सीटें ही जीत सकी थी, लेकिन इस बार उसे दो सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है. लखनऊ स्नातक सीट से कांति सिंह पटेल समाजवादी की स्नातक सीट जीत गई है. इस बार सपा ने 5 सीटें जीतकर माहौल बना दिया है. अखिलेश ने इस जीत की अपने कार्रकर्ताओं को बधाई दी है और कहा है कि कोई जश्न और जुलूस नहीं निकालना चाहिए नहीं तो भापजा बहाना लेकर सपा को बदनाम करेगी.

चुनावी परिणाम के सियासी मायने

शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परंपरागत रूप से केवल आम जनता के नहीं, बल्कि शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और स्नातकों के वोट बैंक का प्रतिनिप्रतिनिधित्व करते हैं. बीजेपी ने 11 एमएलसी सीटों में से 6 सीटें जीत ली हैं. इसके बाद भी बीजेपी खेमे में मायूसी दिखाई दे रही है, क्योंकि समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में भाजपा को लखनऊ और आगरा में हराया है, जो बीजेपी का गढ़ माना जाता है.

विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव और विधानसभा चुनाव के स्वरूप में बड़ा अंतर होता है, इसलिए एमएलसी नतीजों का सीधा असर विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ता है, लेकिन यह राजनैतिक माहौल (Perception) और जमीनी पकड़ को जरूर प्रभावित करता है, हालांकि मएलसी की ये सीटें स्नातक (Graduates) और शिक्षक (Teachers) मतदाताओं द्वारा चुनी जाती हैं. इन सीटों पर सपा की जीत यह संकेत देती है कि शिक्षित युवाओं, बेरोजगारों और सरकारी कर्मचारियों के बीच सत्ता विरोधी लहर या असंतोष हो सकता है.

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