Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, जिसे US सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया. ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों के अंदर टैरिफ को लेकर एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसके अनुसार, दुनिया के सभी देशों से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया जाएगा. इसकी पुष्टि खुद डोनाल्ड ट्रंप ने की है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म सोशल ट्रूथ पर एक पोस्ट करते हुए जानकारी दी है. जिसमें लिखा, “यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैंने अभी-अभी ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर साइन किया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा. इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद.”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, "यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैंने अभी-अभी ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर साइन किया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद!" pic.twitter.com/YitZRtPdOm
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 21, 2026
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के अवैध घोषित करने के बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया है, जो पांच महीने तक प्रभावी रहेगा. धारा 122 राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार देती है, लेकिन सिर्फ 150 दिनों तक ही. इसको आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी संसद में पास कराना जरूरी होगा. अमेरिकी प्रशासन इस दौरान सभी देशों पर उचित टैरिफ तय करने के लिए सभी जरूरी जांच भी करेगा. हालांकि ट्रंप अभी भी पीछे हटने के लिए राजी नहीं हो रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर शुल्क को बढ़ाया भी जा सकता है.
US सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया खारिज?
US सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कांग्रेस की बिना मंजूरी के टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है. राष्ट्रपति के इस फैसले को कोर्ट ने निराशाजनक बताया और अवैध करार दिया.
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टैरिफ से वसूली गई राशि को वापस करेंगे ट्रंप?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप से जब टैरिफ से वसूली गई राशि को वापस करने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह मामला अगले दो सालों तक मुकदमेबाजी में रहेगा. हालांकि, कोर्ट ने भी रिफंड को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं. अब देखना यह होगा यह कि आखिर वसूली गई राशि को वापस की जाती है या नहीं.
