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ईरान में न अमन, न चैन

protests in Iran

ईरान में सरकार के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन

ईरान अशांत है। वह फिलवक्त दो पाटों में फंसा हुआ है। एक ओर तो घरेलू मोर्चे पर देगची में असंतोष खलभला रहा है, दूसरी ओर लंबे अर्से से आर्थिक-पाबंदियां झेल रहे ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘कभी भी कार्रवाई’ की धमकी ने सांसत में डाल दिया है। यद्यपि ईरान ने युद्ध के लिये तैयार रहने और आक्रमण होने पर करारा जवाब देने की बात कही है, अलबत्ता उसने अमेरिका के साथ वार्ता के लिये भी तत्परता दर्शायी है। गौरतलब है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच दौत्य-संबंध नहीं है और उनके बीच संदेशों के आदान-प्रदान का दायित्व स्विस-दूतावास निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघायेई का कहना है कि मध्यपूर्व के लिये ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकोफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची के बीच संचार-प्रणाली चालू है और पड़ने पर संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

सोमवार 12 जनवरी को ईरानी विदेशमंत्री यह कहते हुये उद्‌धृत किये गये कि ईरान ने युद्ध के साथ-साथ वार्ता के लिये अपने दरवाजे खुले रखे हैं। उनके इस बयान को तेहरान की मनःस्थिति के परिचायक के तौर पर देखा जा सकता है। यह इस बात का द्‌योतक है कि तेहरान जंग की बात भले ही कहे, लेकिन गहन आंतरिक असंतोष के इस कठिन दौर में वह अपनी ओर से जंग के लिये अनिच्छुक है और जैसे भी हो वह जंग को टालना चाहेगा।

ईरान के इस्लामी गणतंत्र के लिये मुसीबतों का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वहां करीब एक पखवाड़े से उग्र प्रदर्शनों का तांता लगा हुआ है। 28 दिसंबर से शुरू हुये उन प्रद‌र्शनों पर काबू पाने के लिये पुलिस को जगह-जगह गोलियां चलानी पड़ी है। इसके फलस्वरूप अब तक 646 लोगों की जान जाने की खबर है। इनमें 505 प्रदर्शनकारियों, 113 सुरक्षाकर्मियों और सात तमाशबीनों का समावेश है। इसके अलावा 579 मौत की पुष्टि होना अभी शेष है और उनकी तफ्तीश की जा रही है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के प्रति कड़ाई बरतने के संकेत दिये हैं और एक पखवाड़े की अवधि में दस हजार से अधिक ईरान को गिरफ्तार किया है।

युद्ध के मुहाने पर खड़ा इस्लामिक देश

इन दिनों घड़ी सुइयां तेजी से घूम रही है। शनिवार को तेहरान् में ईरान ने ब्रिटिश राजदूत को तलब किया और ब्रिटेन के विदेश मंत्री के ईरान को लेकर बयान के जरिये दखलंदाजी पर नाराजगी का इजहार किया। साथ ही इस वाकये पर भी अप्रसन्नता व्यक्त की गयी, जिसमें लंदन में एक युवक ने ईरान के दूतावास पर लगा ईरानी झंडा हटाकर वहां सन 1979 की इस्लामी क्रांति के पूर्व प्रयुक्त झंडे से मिलता जुलता ध्वज फहरा दिया। ब्रिटेन ने अधिकारिक तौर पर इस बाबत कोई वक्तव्य जारी नहीं किया है। इस उस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कली बाफ ने वाशिंगटन को चेतावनी दी कि वह ईरान को कमजोर समझने की गलती नहीं करे। ईरान की क्रांतिकारी गारद के मुखिया रह चुके कुली बाफ ने तुर्श लहजे में कहा कि ईरान पर हमले की हालत में इजरायल तथा अमेरिका के सभी अड्डे और जलपोत हमारे निशाने पर होंगे।

ईरान पर विश्व राजनय की दशा और दिशा को संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अंतोनियो गुटर्रेस के उस बयान से भी समझा जा सकता है, जिसमें उन्होंने ईरान में आंतरिक हिंसा से स्तब्ध होने और ईरानी सरकार से हिंसा के बजाय संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण इकट्ठा होने और प्रदर्शन का सम्मान किया जाना चाहिये। प्रदर्शन और दमन की खबरों के बीच शनिवार को इस्रायल के प्रधानमंत्री वेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रूबियो ने फोन पर बातचीत की। रिपब्लिकन सिनेटर रैंड पॉल और डेमोक्रेट सिनेटर मार्क वानर ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य आक्रमण की संभावना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विदेशी हमले की स्थिति में ईरानी आवाम हमले के खिलाफ एकजुट हो जायेगा। विशेषज्ञों का मत है कि इससे ईरानी सरकार को असंतोष पर काबू पाने में मदद मिलेगी। मत-मतांतरों के कुहासे में अब लोगों की नजर मंगलवार को राष्ट्रपति की अमेरिकी सांसदों व सलाहकारों से मुलाकाता के नतीजों पर है। उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका और इस्रायल पर ईरान में अस्थिरता का जाल बुनने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मनों ने आतंकवादियों को उकसाया है और ये दहशतगर्द मस्जिदों, बैंकों और सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने ईरानी अवाम से दंगाइयों से दूर रहने की अपील करते हुये कहा कि सरकार अवाम से बातचीत और आर्थिक मसले सुलझाने को तैयार है।

गत सप्ताहांत राष्ट्रपति ट्रंप के एक्स पर इस आशय के बयान के बाद ईरान समेत मध्यपूर्वक के मुल्कों की धुकधुकी बढ़ गयी है कि ईरानी जनता आजादी की ओर ताक रही है। ऐसा संभवतः पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने लिखा: ‘द यूएसए स्टैंड्स रेडी टु हेल्प।’ ट्रंप जो हाल में वेनेजुएला में अपनी फिल्लियाँ फड़‌का चुके हैं, के रेडी टु हेल्प कथन के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। इस बीच ईरान के निर्वासित, पूर्व सम्राट के बेटे रजा पहल्वी ने ट्रंप की ईरानी अवाम की ‘अवर्णनीय वीरता’ की सराहना की है। उन्होंने ईरानियों से कहा कि सड़‌कें खाली मत छोड़िये।

इजरायल क्या करेगा?

वर्तमान संकट में तेल अवीव को अपने स्थायी शत्रु से छुटकारा पाने का ‘सुअवसर ‘नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि घटनाक्रम पर तेल अवीव की पैनी निगाह है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्शियन स्टेट (ईरान) को जल्द ही अत्याचारों से मुक्ति मिलेगी। उलेखनीय है कि इस्रायल में ताजा घटनाक्रम और आशंकाओं के मद्देनजर ‘हाई अलर्ट’ लागू कर दिया गया है। करीब एक छमाही ही बीती है, जब इस्रायल और ईरान के दरम्यान 12 दिन जंग चली थी। जून में हुई जंग में अमेरिका ने इस्रायल का साथ दिया था। उसने ईरान के परमाणु-ठिकाने तबाह कर दिये थे। बदले में ईरान ने इस्रायल और कतर में अमेरिकी ठिकाने पर मिसाइलें दागीं थीं। किस्सा कोताह यह कि अमेरिका की सीधी कार्रवाई की आशंकाओ के बीच स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ईरान में अमन-चैन को नामोनिशां नहीं है और वह दोहरे संकट से जूझ रहा है।
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