Pakistan News: पाकिस्तान में सत्ता की कुर्सी भले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास हो. लेकिन, फैसलों की चाबी किसके हाथ में है? इस को लेकर बहस तेज हो गई है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने असीम मुनीर पर हमला बोला है, जिससे पाकिस्तान की सियासत में हलचल मच गई है. उनका दावा है कि सरकार की शक्तियां धीरे-धीरे मुनीर के हाथों में जा रही हैं. शहबाज शरीफ की सरकार महज नाम भर की रह गई है.
मौलाना फजलुर रहमान ने विपक्षी दलों की बैठक में कहा कि पाकिस्तान में संघीय सरकार के अधिकार लगातार कम किए जा रहे हैं. उनके मुताबिक सेना में नियुक्तियों से लेकर दूसरे अहम अधिकारों तक में ऐसे बदलाव हुए हैं, जिनसे फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ताकत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.
पाकिस्तान में एक कुर्सी, कई पावर
रहमान का तर्क है कि असीम मुनीर अब सिर्फ सेना प्रमुख नहीं हैं. उनके पास फील्ड मार्शल का पद है और वह देश के रक्षा ढांचे में भी शीर्ष भूमिका निभा रहे हैं. मौलाना का सवाल सीधा है, जब इतनी पावर एक ही व्यक्ति के पास होंगे तो फिर प्रधानमंत्री और कैबिनेट के फैसलों की असली ताकत कितनी बचेगी? कुल मिलाकर उन्होंने ये कह दिया कि असल मायने में पाकिस्तान को असीम मुनीर ही चला रहे हैं. फजलुर रहमान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत बताया है.
‘वर्दी उतारिए और चुनाव लड़िए’
फजलुर रहमान का हमला यहीं नहीं रुका है. उन्होंने मुनीर को खरी-खोटी सुनाते हुए सीधे कह दिया कि अगर राजनीति ही करनी है, तो वर्दी उतार दीजिए. इसके बाद चुनाव लड़कर जनता से वोट मांगिए. वर्दी में राजनीति नहीं करें.
उन्होंने नागरिकों से हथियारबंद समूह बनाने की अपील के विचार का भी विरोध किया है. रहमान का कहना है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और सुरक्षा संस्थानों की है, आम नागरिकों को हथियार थमाने से समस्या खत्म होने के बजाय हिंसा और दुश्मनी का सिलसिला और लंबा हो सकता है.
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