कैसे बना जेनेवा कन्वेंशन? जिससे तय हुए युद्ध के नियम, आज अमेरिका उड़ा रहा धज्‍ज‍ियां

What is Geneva Convention: दुनियाभर के कई देशों के बीच युद्ध हुए हैं. हालांकि हर जंग में जेनेवा कन्वेंशन का पालन किया गया. लेकिन ईरान से जंग में अमेरिका इस संधि की ही धज्‍जि‍यां उड़ा रहा है. ऐसे में समझते हैं कि क्या है जेनेवा कन्वेंशन और इसका गठन कैसे किया गया था.
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जेनेवा संध‍ि का उल्‍लंघन कर रहा अमेरिका

What is Geneva Convention: ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग को 35 दिन हो चुके हैं. इस जंग के कारण पूरी दुनिया परेशान नजर आ रही है, तो वहीं जंग खत्म होने को लेकर भी अब तक कोई भी जानकारी किसी के पास नहीं है. अमेरिका भले ही जंग जीतने के लाख दावे कर रहा है. हालांकि हकीकत इसके उलट है. दूसरी तरफ अमेरिका जो ईरान पर हमले कर रहे हैं, उसमें भी सारी हदें पार कर रहा है. अमेरिका लगातार ईरान अस्पताल, रिहायशी इलाके और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर रहा है. यही वजह है कि वह सालों पहले बने  जेनेवा कन्वेंशन को भी नहीं मान रहा है.

अमेरिका इस जंग में खुले तौर पर  जेनेवा कन्वेंशन की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर जेनेवा कन्वेंशन है क्या और इसमें क्या कहा गया है और किस तरह से इस युद्ध में इसका उल्लंघन हो रहा है.

आखिर क्या है जेनेवा कन्वेंशन?

दुनियाभर में हर काम को करने के लिए कुछ शर्तें और नियम बनाए गए हैं. इसमें बताया जाता है कि आप किस तरह से उस काम को करें और उस काम के दौरान आप किस तरह की चीजें नहीं कर सकते हैं. इसी तरह के नियम जंग को लेकर भी बनाए गए हैं. मतलब भले ही जंग चल रही हो इसके बाद भी हमें अपनी मानवीय संवेदनाएं नहीं भूलनी चाहिए.

जेनेवा कन्वेंशन की शुरुआत साल 1949 में की गई थी. उस समय इसी नींव रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यूनेन्ट ने रखी थी, इसके पीछे की वजह उन्‍होंने साल 1859 में सॉल्फेरिनो के युद्ध में घायल सैनिकों को बेहद करीब से देखा था. उस दौरान बड़ी संख्या में सैनिक घायल हुए थे, जिन्हें इलाज भी नहीं मिल पा रहा था. इसके बाद भी दुश्मनों की तरफ से लगातार उन पर हमले किए जा रहे थे. इस मंजर के बाद ही उन्‍होंने तय किया था कि इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाएंगे.

हेनरी ड्यूनेन्ट की पहल के बाद ही साल 1964 में पहली संधि की गई थी. जिसका मुख्य उद्देश्य युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की स्थिति में सुधार करना था. इसके बाद ही जेनेवा संधियों का सिलसिला शुरू हो गया था. हालांकि आज जिस संधि के बारे में हम लोग पढ़ते और बातचीत करते हैं, उसे साल 1949 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तैयार किया गया था, जिसे हम सब लोग जेनेवा कन्वेंशन के नाम से जानते हैं.

कैसे बना जेनेवा कन्वेंशन?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जेनेवा कन्वेंशन में तीन एक्‍स्‍ट्रा प्रोटोकॉल शामिल किए गए थे. इनके अनुसार दो देशों के बीच अगर युद्ध चल रहा है तो यह युद्ध केवल और केवल लड़ाकों के बीच होना चाहिए. किसी भी हालत में युद्ध उन लोगों के खिलाफ नहीं लड़ा जाना चाहिए जो हथियार छोड़ चुके हैं या फिर कभी युद्ध का हिस्सा ही नहीं थे.

शुरुआत में जेनेवा कन्वेंशन में फ्रांस, ऑस्ट्रिया, पर्शिया, इटली, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय राष्ट्र शामिल थे. इस वक्त युद्ध में घायल सैनिकों को बिना भेदभाव के मेडिकल  सुविधा देना था. हालांकि समय के साथ-साथ दुनियाभर के देश इसमें शामिल होते गए. आज दुनिया के 194 से अधिक देश इन संधियों से बंधे हुए हैं, जो इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का सबसे व्यापक और स्वीकृत हिस्सा बनाता हैं. 

किस तरह से लड़ा जाएगा युद्ध

जेनेवा कन्वेंशन की तरफ से ही तय किया गया था कि आने वाले भविष्य में युद्ध कैसे लड़ा जाएगा. इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि किन जगहों पर हमले नहीं करने हैं.

  • युद्ध में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों पर हमला नहीं किया जा सकता है.
  • एक देश दूसरे देश के स्कूल, अस्पताल, घर आदि को टारगेट नहीं बना सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह चीजें आम जनता से जुड़ी होती हैं.
  • इसमें यह भी तय किया कि अगर कोई सैनिक या फिर आम नागरिक किसी भी देश की सीमा में पड़ा है, तो उसे हर हाल में मेडिकल सुविधा दी जानी चाहिए. भले ही वह दुश्मन ही क्यों न हो.

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