Bilaspur High Court: राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली साल 2018 की चुनाव याचिका में एक अहम चरण पूरा हो गया है. कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए गए सभी गवाहों की गवाही बुधवार को पूरी हो गई.
सरोज पांडेय पर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप
अब भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार और तत्कालीन विजेता सरोज पांडे की ओर से अपने निर्वाचन के पक्ष में गवाह प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनकी गवाही और प्रति-परीक्षण हाईकोर्ट में होगा.
उच्च न्यायालय में चल रही इस चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान आज विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही दर्ज की गई. इसके साथ ही लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले कुल नौ गवाहों की गवाही समाप्त हो गई.
क्या है पूरा मामला?
- मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए चुनाव हुआ था.
- इस चुनाव में भाजपा की ओर से सरोज पांडे और कांग्रेस की ओर से लेखराम साहू उम्मीदवार थे.
- नामांकन दाखिल होने के बाद लेखराम साहू ने सरोज पांडे पर अपने निर्वाचन शपथ पत्र में गलत जानकारी देने, तथ्यों को छिपाने और एक बैंक खाते की जानकारी नहीं देने जैसे आरोप लगाए थे.
18 विधायकों के मतदान पर उठा था विवाद
इसके अलावा कांग्रेस पार्टी और लेखराम साहू ने भाजपा के 11 विधायकों पर संसदीय सचिव तथा 7 विधायकों पर निगम-मंडलों में अध्यक्ष/उपाध्यक्ष होने के कारण लाभ का पद धारण करने का आरोप लगाया था. इस आधार पर इन 18 विधायकों को मतदान से वंचित करने की मांग की गई थी. हालांकि, उस समय राज्यसभा निर्वाचन अधिकारी ने दोनों आपत्तियों को खारिज कर दिया था.
इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय चुनाव आयोग और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से भी शिकायत करते हुए चुनाव स्थगित करने और 18 विधायकों को मतदान से रोकने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद सभी 18 विधायकों ने मतदान किया और सरोज पांडे को विजयी घोषित किया गया.
