CG News: आरंग क्षेत्र में महानदी में लगातार अवैध उत्खनन हो रहा है. स्वीकृत क्षेत्र से अधिक खुदाई के मामले में लोगों ने प्रशासन से शिकायत करने के साथ ही जनहित याचिका दायर की थी. प्रशासन की ओर से कोर्ट में कहा गया कि पहले ही इस पर कार्रवाई की जा चुकी है. हाई कोर्ट ने इस जवाब को शपथ पत्र में प्रस्तुत करने कहा है.
महानदी में फेंका माइनिंग वेस्ट, 400 एकड़ जमीन हुई बंजर
आरंग क्षेत्र के ग्राम पंचायत निसदा के अंतर्गत पिछले 2 साल से पर्यावरण विभाग की बिना स्वीकृति के 15 चूना पत्थर खदान संचालित होने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा की गई। शिकायत रायपुर कलेक्टर, खनिज विभाग सहित संबंधित विभागों में की गई थी लेकिन खनिज विभाग द्वारा खदान संचालकों पर जुर्माना लगाकर सिर्फ खानापूर्ति की गई. दरअसल ग्राम निसदा में महानदी पर बैराज बना हुआ है,जिससे महासमुंद जिले और आरंग रायपुर जिले में जल आपूर्ति होती है। इसके अलावा निसदा में बड़ी संख्या में चूना पत्थर खदान और पॉलिश कारखाना है.
गांव में बाढ़ का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि निसदा में 15 चूना पत्थर खदान हैं,लेकिन पिछले 2 साल से बिना पर्यावरण स्वीकृति के खदान अवैध रूप से संचालित हो रही हैं. खदानों के अपशिष्टों को महानदी के तट पर भंडारण किया जा रहा है. रोजाना सैकड़ों वाहन कटिंग पत्थर से महानदी को पाट रहे है जिससे ग्राम निसदा में महानदी की चौड़ाई सिमट गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि भविष्य में इसको गंभीरता से नहीं लिया गया तो गांव में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाएगी. प्रशासन की ओर से बताया गया कि खनिज विभाग की टीम द्वारा आरंग के अंतर्गत समोदा,कागदेही व हरदीडीह रेत खदान क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करते हुए एक मोटर बोट सक्शन मशीन (पनडुब्बी) एवं एक चेन माउंट मशीन जब्त कर खनन कार्य तत्काल बंद करवाया गया। वहीं कागदेही रेत खदान को सील कर दिया गया है.
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हाई कोर्ट ने पूर्व में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि रेत खनन, भंडारण और परिवहन करने वालों को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि आपराधिक मामला दर्ज करना चाहिए. हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को अवैध रेत खनन पर सख्त निर्देश देते हुए नियमित निगरानी देने का भी कहा था.
