Bilaspur News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन की सीट के लिए दिए गए 56 लाख रुपए की वापसी को लेकर बड़ा फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी अवैध कार्य सार्वजनिक नीति के विरुद्ध समझौते के लिए पैसों की लेनदेन करता है, तो उस पैसे की वापसी के लिए कानूनी सहायता नहीं मांग सकता है.
क्या है पूरा मामला?
- दरअसल, बिलासपुर निवासी डॉक्टर केके अग्रवाल ने अपने बेटे के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए मनेंद्रगढ़ के रहने वाले नयन दत्त नाम के व्यक्ति को 56 लाख रुपए दिए थे.
- डीआर के अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नयन ने खुद को मुख्यमंत्री का करीबी बताया था और इस भरोसे पर उन्होंने यह पैसे दिए और रकम वापसी के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
20 अक्टूबर 2023 को कोर्ट ने 6 प्रतिशत के साथ डॉक्टर को पैसे लौटाने के पक्ष में आदेश किया था, जिसकी अपील हाई कोर्ट में हुई थी. इसी मामले पर हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले में दोनों दोषी हैं, क्योंकि डॉक्टर के के अग्रवाल यह जानते थे कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के नाम पर दी जा रही रकम विधि सम्मत नहीं है.
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि गंदे हाथों से न्याय मांगने आने वालों के लिए यह उचित कदम नहीं है, क्योंकि जब पैसे देने वाले को ही पता है कि यह उद्देश्य गलत है तो आखिर कानूनी सहायता की मांग क्यों सही हो सकती है.
