Durg News: प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाला दुर्ग जिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सवालों के घेरे में है. डिलीवरी के दौरान लापरवाही और जबरन प्रसव कराने के आरोप के बीच नवजात की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन न्याय की मांग लेकर कोतवाली थाने पहुंच गए. घटना से अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है और जांच की बात कही जा रही है.
क्या है पूरा मामला?
मृत नवजात की मां ने बताया कि 7 फरवरी को उन्हें लेबर पेन हुआ, जिसके बाद वे जिला अस्पताल पहुंचीं. डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती तो कर लिया, लेकिन चार दिनों तक नॉर्मल डिलीवरी का इंतजार कराया गया. परिजनों का आरोप है कि बार-बार सिजेरियन करने की मांग के बावजूद डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया. आखिरकार 10 फरवरी की सुबह करीब 3 बजे जबरन डिलीवरी कराई गई. मां ने कहा कि 11 फरवरी की सुबह करीब 2:30 बजे बच्चे का जन्म हुआ. इसके तुरंत बाद डॉक्टरों ने बताया कि निकलते समय बच्चे के मस्तिष्क में चोट लग गई है और उसकी हालत गंभीर है.
मृत बच्चे की मां का क्या आरोप है?
नवजात को तुरंत आईसीयू ले जाया गया. वहां मौजूद डॉक्टरों ने परिजनों से कहा कि बच्चा बेहद खराब स्थिति में पहुंचा है, फिर भी उसे बचाने की कोशिश की जाएगी. लेकिन आज सुबह करीब 8:30 बजे परिवार को सूचना दी गई कि बच्चे की मौत हो गई है. मां का आरोप है कि जिस डॉक्टर ने डिलीवरी कराई, वह अब तक अस्पताल नहीं पहुंचे हैं. डिलीवरी के बाद बच्चा खत्म हो जाने से आक्रोशित परिजन अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की.
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सिविल सर्जन डॉ. हेमंत कुमार साहू ने क्या बताया?
वहीं सिविल सर्जन डॉ. हेमंत कुमार साहू ने बताया कि नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए उसे आईसीयू में भर्ती किया गया था. उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है और जो भी डॉक्टर दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
