CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक अहम फैसले में पिता द्वारा बेटे की हत्या के मामले में बड़ा संशोधन करते हुए आरोपी को हत्या (धारा 302) के बजाय गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-1) का दोषी ठहराया है. कोर्ट ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने दिया।
क्या है पूरा मामला?
- 20 जुलाई 2019 की रात ग्राम सस्कोबा, जिला रायगढ़ में घरेलू विवाद के दौरान आरोपी रतीराम मांझी और उसके पुत्र गोपाल मांझी के बीच तीखी कहासुनी हुई.
- मृतक की पत्नी गोंडा बाई मांझी के अनुसार, विवाद परिवार और पुनर्विवाह को लेकर हुआ था। रात करीब 1 बजे, पिता और पुत्र घर से बाहर निकले.
- कुछ समय बाद आरोपी घर लौटा और बताया कि उसने गोपाल को पीटा है. इसके बाद परिजन तलाश में निकले और हुदर झरखा के पास गोपाल मांझी गंभीर हालत में पड़ा मिला, जिसके चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें थी.
- उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले राज
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि मृतक के चेहरे और सिर पर छह गहरी धारदार चोटें थीं, खोपड़ी में फ्रैक्चर, दिमाग की झिल्ली फटी हुई थी और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ था. मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव से उत्पन्न शॉक बताया गया और मृत्यु को हत्या करार दिया गया. सत्र न्यायालय घरघोड़ा ने आरोपी को धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
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हाई कोर्ट ने क्यों बदला फैसला
हाईकोर्ट ने पूरे साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन करते हुए माना कि, घटना अचानक हुए पारिवारिक झगड़े में हुई थी. कोई पूर्व नियोजित योजना या साजिश नहीं थी. वारदात आवेग और आवेश में हुई, हालांकि आरोपी को यह ज्ञान था कि सिर पर वार से मृत्यु हो सकती है. हाईकोर्ट ने कहा कि, यह हत्या की मंशा से नहीं बल्कि अचानक हुए विवाद और आवेश में किया गया कृत्य है, इसलिए यह हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या है.
