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Bastar News: आदिवासी दिवस और बस्तर दशहरा से पहले बवाल! देवस्थल और मुरिया दरबार के नाम पर शुरु हुई तकरार, जानें मामला

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देवस्थल और मुरिया दरबार के नाम पर बवाल

Bastar News: विश्व आदिवासी दिवस और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा से ठीक पहले बस्तर में आदिवासी आस्था, संस्कृति-परंपरा को लेकर विवाद गहरा गया है. बुधवार को एक ही दिन सामने आई दो घटना ने प्रशासन और आदिवासी समाज को आमने-सामने खड़ा कर दिया है. पहली घटना कलेक्ट्रेट में विश्व आदिवासी दिवस की तैयारी बैठक में हुई. प्रतापगंज पारा के देवस्थल पर पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं मिलने पर मूल आदिवासी समाजों के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. वहीं बस्तर दशहरा के आधिकारिक कार्यक्रम व पूजा विधान कार्ड में मुरिया दरबार के स्थान पर आम दरबार प्रकाशित होने पर आदिवासी समाज ने इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूल बताया। सुधार की मांग की है.

आदिवासी दिवस और बस्तर दशहरा से पहले बवाल

कलेक्ट्रेट के आस्था सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन ने 9 अगस्त को होने वाले विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन, सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था को लेकर समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा की. बैठक के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने प्रतापगंज पारा स्थित देवस्थल पर पारंपरिक पूजा-अर्चना की अनुमति देने का आग्रह किया. उनका कहना था कि बस्तर में किसी भी बड़े सामाजिक और धार्मिक आयोजन की शुरुआत देवस्थल पर पूजा से होती है, आदिवासी दिवस भी उसी परंपरा का हिस्सा है. समाज ने सुझाव दिया कि भीड़ पर प्रशासन को आपत्ति है तो केवल समाज प्रमुखों और पुजारियों को सीमित संख्या में पूजा की अनुमति दी जाए. इस पर भी सहमति नहीं बनी. इसके बाद उन्होंने बैठक छोड़ दी.

क्या है पूरा मामला?

बताते चले कि यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. पहले इस जमीन को सरकारी पार्किंग के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन बाद में इसे दिगम्बर जैन समाज को दे दिया गया. वहीं, आदिवासी समाज के एक गुट ने इस जमीन पर परंपरागत तरीके से बलि देकर इसे अपना बताया और आवंटन रद्द कर जमीन आदिवासी समाज को देने की मांग दोहराई. अब देखना होगा कि कोर्ट का फैसला और प्रशासन का रुख इस संवेदनशील मुद्दे को किस दिशा में ले जाता है, लेकिन फिलहाल यह विवाद सामाजिक तनाव का कारण बनता जा रहा है.

मुरिया दरबार को दिया आम दरबार का नाम

वही दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी द्वारा बस्तर दशहरा 2026 के कार्यक्रम रूपरेखा में मुरिया दरबार की जगह आम दरबार प्रकाशित होने पर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और समाज का कहना है कि वर्ष 1875 से बाहर रैनी के दूसरे दिन सिरहासार भवन में मुरिया दरबार का आयोजन होता आया है लेकिन साजिशन इसे आम दरबार नाम दिया जा रहा है. इसे लेकर मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने कहा अक्सर रूपरेखा में आम दरबार लिखा जाता है प्रशासन आमंत्रण के दौरान मुरिया दरबार लिखते है. राजा समय भी आम दरबार लिखा जाता है.

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