CG News: बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान गोंचा महापर्व का शुभारंभ सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा और चंदन यात्रा के साथ विधिवत हो गया. परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का इंद्रावती नदी के पवित्र जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाअभिषेक किया गया.
देव स्नान के बाद भगवान 15 दिनों के अनवासर (विश्राम) काल में रहेंगे. इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होंगे. इसके बाद नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा और फिर भगवान रथ पर आरूढ़ होकर नगर भ्रमण के लिए जनकपुरी की ओर प्रस्थान करेंगे.
360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज की सहभागिता से संपन्न हुआ अनुष्ठान
360 घर अरण्य ब्राह्मण समाज की सहभागिता से इस वर्ष देव स्नान अनुष्ठान को नए स्वरूप में संपन्न कराया गया. महिलाओं और पुरुषों ने इंद्रावती नदी से कलशों में पवित्र जल लाकर धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया. वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.
पुरी की परंपरा से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है. देव स्नान के बाद भगवान को विश्राम के लिए मुक्ति मंडप में विराजमान किया जाएगा, जहां वे 15 दिनों तक अनवासर काल में रहेंगे. इसके पश्चात नेत्रोत्सव का आयोजन होगा और फिर भव्य गोंचा रथयात्रा के साथ महापर्व अपने मुख्य आयोजन में प्रवेश करेगा.
श्रद्धालुओं से महापर्व में शामिल होने की अपील
आयोजकों ने शहरवासियों और श्रद्धालुओं से गोंचा महापर्व में बढ़-चढ़कर शामिल होने तथा भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है. उनका कहना है कि यह महापर्व बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
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