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CG News: प्रदेश में कोनोकार्पस पौधे पर लगा प्रतिबंध, दुर्ग में लगे 10 हजार पेड़ों पर पड़ेगा असर

Ban imposed on Conocarpus plants in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में कोनोकार्पस पौधे पर लगा प्रतिबंध

CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विदेशी प्रजाति के कोनोकार्पस पौधे के रोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. इस फैसले का असर दुर्ग जिले में भी दिखाई देगा, जहां नगर निगमों और अन्य निकायों द्वारा लगाए गए करीब 10 हजार कोनोकार्पस के पेड़ लगे हैं.

स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा

पर्यावरण विशेषज्ञ एन. के. जैन ने बताया कि कोनोकार्पस तेजी से फैलने वाली विदेशी प्रजाति है, जो स्थानीय जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. इसकी शाखाओं पर पक्षी न तो घोंसला बनाते हैं और न ही बैठना पसंद करते हैं, जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है. यह पौधा जमीन से अत्यधिक मात्रा में पानी खींचता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर गिरने की आशंका बढ़ जाती है.

एलर्जी और श्वसन रोगों का भी खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके परागकण और जैविक प्रभाव एलर्जी, अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि सरकार ने इसे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक मानते हुए सख्त कदम उठाया है.

सभी विभागों और संस्थाओं पर लागू होगा प्रतिबंध

यह प्रतिबंध केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू होगा. अब प्रदेश में कहीं भी नया कोनोकार्पस पौधा नहीं लगाया जा सकेगा.

स्थानीय प्रजातियों से होगी भरपाई

दुर्ग और भिलाई नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक करीब साढ़े छह हजार पौधे लगे हैं. इनमें नेशनल हाईवे के डिवाइडर, नंदिनी रोड, नेहरू नगर केपीएस रोड, गौरव पथ, टाउनशिप के सेक्टर-5 और कई प्रमुख उद्यान शामिल हैं. अब इनकी जगह स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के पौधे लगाए जाने की तैयारी की जाएगी.

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