Advocate Couple Social Boycott: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आज के दौर में भी सामाजिक भेदभाव को दर्शाती है. खैरागढ़ जिले के रहने वाले एक वकील दंपती पिछले एक साल से सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं और उन्हें समाज से दूर रखा गया है. पीड़ित दंपति का कहना है कि पिछले एक साल से उन्हें गांव की किसी भी शादी में शामिल नहीं होने दिया जाता है और न ही किसी भी व्यक्ति से मिलने की अनुमति दी जाती है.
इसके अलावा, गांव में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है उन्हें उसके अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होने दिया जाता. दंपति का यह भी आरोप है कि समाज द्वारा उन पर शादी को लेकर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और एक हजार लोगों को दावत देने का दबाव बनाया जा रहा है. इसके बाद भी समाज और गांव उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं है.
अंतरजातीय विवाह के कारण सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ रहा
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के रहने वाले वकील दंपति को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. खबरों के अनुसार, सितंबर 2025 में वकील नेमीचन्द्र वर्मा ने अपनी साथी प्रमिला सोनकर से प्रेम विवाह किया था. नेमीचन्द्र लोधी समाज से आते हैं, जबकि उनकी पत्नी प्रमिला की जाति अलग है. इसी अंतरजातीय विवाह के कारण समाज और गांव उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है. इस सामाजिक बहिष्कार से परेशान होकर दोनों पति-पत्नी ने पुलिस से सहायता ली है. उन्होंने खुद को समाज का नेता बताने वाले कुछ लोगों पर गैर-कानूनी तरीके से सामाजिक बहिष्कार करने का आरोप लगाया है.
दंपति का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया
खबरों के अनुसार, पीड़ित दंपति ने आरोप लगाया है कि उनकी शादी होते ही लोधी समाज के नेताओं ने उनके पूरे परिवार का ‘हुक्का-पानी बंद’करने का ऐलान कर दिया. यह समाज से बाहर करने का एक पुराना और पारंपरिक तरीका है, जिसके तहत गांव और समाज का कोई भी व्यक्ति उनसे किसी भी तरह का संबंध नहीं रख सकता.
35 हजार रुपए का लगाया गया जुर्माना
वहीं पीड़ित वकील नेमीचंद का आरोप है कि समाज की एक बैठक के दौरान उन पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा उनसे यह भी कहा गया है कि जब तक वे करीब 1000 लोगों को सामूहिक दावत पर नहीं बुलाते, तब तक समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा.
