Durg News: दुर्ग जिले में सिबिल स्कोर बेहतर बनाने, हर फाइनेंस पर 2 से 3 हजार रुपये कमीशन दिलाने और ईएमआई खुद भरने का लालच देकर छात्रों, प्रोफेसरों और बेरोजगार युवाओं के नाम पर लोन लेने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है. पदमनाभपुर थाना पुलिस ने अब तक 31 छात्रों से 34.13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. पुलिस ने ऋषभ शर्मा को गिरफ्तार कर तीन दिन की पुलिस रिमांड के बाद जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी अनिरुद्ध सिंह और दीपेश जोशी को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है.
CSP का क्या कहना है?
सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि मामले की शुरुआत शंकराचार्य कॉलेज के बीकॉम तृतीय वर्ष के छात्र हिमांशु देवांगन की शिकायत से हुई. आरोपियों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान और पर्सनल लोन लेने से सिबिल स्कोर बेहतर होगा, साथ ही हर फाइनेंस पर कमीशन मिलेगा और ईएमआई भी वे स्वयं जमा करेंगे. झांसे में आकर पीड़ितों ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक आरोपियों को सौंप दिए.
आरोपियों ने इन दस्तावेजों के आधार पर आईफोन-13, एलईडी टीवी, एसी जैसे महंगे सामान फाइनेंस कराए और बजाज फाइनेंस से 92 हजार रुपये का पर्सनल लोन लेकर रकम अपने क्यूआर कोड पर ट्रांसफर करा ली. शुरुआती तीन महीने तक ईएमआई भरने के बाद अप्रैल 2026 से किश्तें बंद कर दी गईं.
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600 लोगों को बनाया शिकार
जब रिकवरी एजेंट पीड़ितों के घर पहुंचे, तब उन्हें ठगी का पता चला. पुलिस जांच में सामने आया है कि दुर्ग, भिलाई, रायपुर, बिलासपुर और बालोद सहित कई जिलों में 600 से अधिक लोग इस गिरोह का शिकार हुए हैं और ठगी की रकम 10 करोड़ रुपये से ज्यादा होने की आशंका है. ऋषभ शर्मा के चार-पांच बैंक खातों में करीब 1.84 करोड़ रुपये के लेन-देन का भी खुलासा हुआ है. पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है.
