दुर्ग: डोनर की तलाश में पिता उधर बेटी की थम गई सांसे, अस्पताल में था 85 यूनिट ब्लड फिर भी खून की कमी से गई जान
दुर्ग जिला अस्पताल में युवती की मौत
दुर्ग: दुर्ग जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. ब्लड बैंक में 85 यूनिट ओ पॉजिटिव रक्त उपलब्ध होने के बावजूद सिकलिंग पीड़िता दीपिका को समय पर खून नहीं मिला और उसकी मौत हो गई. जांच के बाद सिविल सर्जन समेत 8 कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है.
दरअसल 1 जून को सिकलिंग बीमारी से पीड़ित 21 वर्षीय युवती दीपिका की मौत के मामले में खुलासा हुआ है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में ओ पॉजिटिव ग्रुप का 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था, इसके बावजूद उसे समय पर एक यूनिट खून नहीं दिया गया. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने नियमों का हवाला देते हुए लगातार डोनर लाने का दबाव बनाया, जबकि मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी.
दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने की जांच
पिता डोनर की व्यवस्था करने के लिए भटकते रहे और इसी बीच दीपिका की मौत हो गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने पूरे घटनाक्रम की जांच की. जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अक्षम्य लापरवाही पाए जाने के बाद सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज सहित आठ स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
सभी से मांगा गया जवाब
सभी से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है.हालांकि इस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और संबंधित विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र कुमार साहू को नोटिस के दायरे से बाहर रखा गया है, जबकि ब्लड बैंक संचालन और रक्त उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं अधिकारियों पर थी.
निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं
ऐसे में कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि दीपिका की मौत के जिम्मेदार लोगों पर वास्तविक कार्रवाई होती है या फिर प्रभावशाली चेहरों को बचाने के लिए मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.
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