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Bastar News: हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटा पापाराव, आखिरी नक्सल लीडर ने सरेंडर के बाद कही ये बात

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नक्सल लीडर पापाराव

Bastar News: बस्तर संभाग में माओवादी विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले एकमात्र आखरी बस्तर के नक्सल लीडर पापाराव ने आत्मसमर्पण के बाद कहा कि उनका फैसला किसी डर का परिणाम नहीं है, बल्कि बदलते जमीनी हालातों और बस्तर के आदिवासियों के हक के लिए एक नई शुरुआत है.

हथियारबंद संघर्ष से अब नुकसान बढ़ रहा है-पापारा

​’ऑपरेशन कगार’ या पुलिस मुठभेड़ों से डरकर उन्होंने सरेंडर नहीं किया है. उन्होंने कहा, “मैं रोम-रोम से नहीं डरा हूँ. बात डर की नहीं है, बल्कि जनता को संगठित करने और पार्टी के भविष्य को बचाने की है. मुझे लगा कि हथियारबंद संघर्ष से अब नुकसान बढ़ रहा है, इसलिए मैंने भारत के संविधान के तहत जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया.”


​घूमने या छिपने की जगह नहीं बची है-पापारा


​पापाराव ने स्वीकार किया कि बस्तर में सुरक्षा बलों के बढ़ते कैंपों (करीब 17-18 नए कैंप) के कारण अब उनके पास घूमने या छिपने की जगह नहीं बची है.उन्होंने बताया: ​”इधर अब जगह नहीं है. आप कहीं भी पाँव रखो, फोर्स ने घेरा हुआ है। ऐसे में बस्तर संभाग की लड़ाई को आगे ले जाने के लिए मुख्यधारा में आना ही एकमात्र विकल्प बचा था.”

​देवजी के जाने के बाद बदली सोच

​बड़े नेता ‘देवजी’ के आत्मसमर्पण पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह विचलित नहीं हुए थे और उन्होंने खुद बस्तर संभाग का नेतृत्व करने की ठानी थी. लेकिन बाद में, संवाद की कमी और बदलते हालातों ने उन्हें पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने अपने पुराने साथियों से भी अपील की है कि वे जंगल छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौट आएं.


​जब उनसे देवजी की उस मांग (CPI माओवादी को राजनीतिक पार्टी का दर्जा देने) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुनाव लड़ना उनका लक्ष्य नहीं है. उनके अनुसार, मुख्य लक्ष्य ‘जनता के लिए काम करना’ है, जो वे अब बिना हथियार उठाए संविधान के दायरे में रहकर करना चाहते हैं.

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