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छत्तीसगढ़ में बड़ी हलचल! JCC समेत 50 दलों ने मिलाया हाथ, ‘तीसरे मोर्चे’ का सबसे बड़ा शंखनाद

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सियासी पिच पर अब मुकाबला दोतरफा नहीं, बल्कि त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प होने जा रहा है. राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने परजमीन तैयार हुई है. राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में रविवार को हुई गुप्त और महा-मंथन बैठक में लगभग 50 क्षेत्रीय दलों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मोर्चों ने हाथ मिलाकर छत्तीसगढ़ की राजनीति की स्थापित धुरी (BJP और कांग्रेस) को चुनौती देने का ऐलान कर दिया है.

 इस तीसरे मोर्चे की सबसे खास और चौंकाने वाली बात यह है कि यह सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पार्टियों के एकाधिकार को नेस्तनाबूद करने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ के तहत उतर रहा है.

इस बैठक के 3 बड़े ‘टर्निंग पॉइंट्स’

आमतौर पर ऐसी बैठकों में दल सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर बात करते हैं, लेकिन इस बार मामला और गंभीर नजर आया. बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया. नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए नियमों का कड़ाई से पालन करने की मांग उठाई है.

मोर्चा पूरी तरह से मूल छत्तीसगढ़ी अस्मिता, क्षेत्रीय मुद्दों और आदिवासियों के अधिकारों पर फोकस कर रहा है. कांग्रेस और बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए इसे सबसे बड़ा हथियार बनाया जा रहा है.

इस मोर्चे में बीएसपी (BSP), गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP), जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (JCC), भीम आर्मी, छत्तीसगढ़िया पार्टी और हमर राज पार्टी जैसे कई आक्रामक क्षेत्रीय दल एक ही छत के नीचे आ गए हैं.

अब आगे क्या? (28 अक्टूबर का मेगा शो)

मामला यहीं थमता नहीं दिख रहा है. सीट शेयरिंग और साझा घोषणापत्र (Common Manifesto) का ब्लूप्रिंट लगभग तैयार है. इस सियासी तूफान का अगला और सबसे बड़ा पड़ाव 28 अक्टूबर 2026 को रायपुर के होटल बेबीलॉन कैपिटल में होने वाली ‘वृहद बैठक’ है. माना जा रहा है कि इस दिन छत्तीसगढ़ के तीसरे मोर्चे के नाम, चेहरे और चुनाव अभियान का आधिकारिक धमाका किया जाएगा.

किस पार्टी से कौन सा नेता मीटिंग में हुआ शामिल

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