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बारिश ने डुबाए 15 लाख, फिर ऐसे खड़े हुए छत्तीसगढ़ के किसान अरुण सार्वा, आज हैं 400 एकड़ के मालिक

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धमतरी

Arun Sarva Dhamtari: कहते हैं खेती में किस्मत का खेल होता है, लेकिन धमतरी जिले के 42 साल के किसान अरुण सार्वा ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है. आज वे जिला पंचायत अध्यक्ष भी हैं और 400 एकड़ में फैले अपने सब्जी साम्राज्य के मालिक भी. उनकी सफलता की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, जिसमें हार, कर्ज और फिर जबरदस्त वापसी सब कुछ है.

बेमौसम बारिश ने फसल को तबाह किया

18 साल की उम्र, जब युवा करियर के सपने देखते हैं, अरुण ने 8-10 एकड़ से खेती शुरू की. साल 2006 उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ था. उन्होंने बड़े पैमाने पर चने की खेती की. फसल शानदार थी, बाजार में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद थी. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कटाई से ठीक पहले हुई बेमौसम बारिश ने पूरी फसल को तबाह कर दिया. हाथ में मुनाफे की जगह 15 लाख रुपये का कर्ज आ गया.

इतनी कम उम्र में इतना बड़ा नुकसान

घरवालों की नाराजगी और कर्जदारों का दबाव. कोई और होता तो खेती छोड़ देता. लेकिन अरुण ने हार मानने के बजाय अपनी खेती का तरीका ही बदल दिया. उन्होंने समझ लिया कि एक ही फसल पर निर्भर रहना सबसे बड़ी गलती है. उन्होंने फसल चक्र को अपनाया.

फिर नुकसान हुआ

उन्होंने पहले मिर्च लगाई, जानकारी कम होने से फिर नुकसान हुआ. लेकिन इस बार उन्होंने नुकसान से सीखा. कृषि वैज्ञानिकों से मिले, बाजार समझा और फिर वैज्ञानिक खेती शुरू की. टमाटर, करेला, खीरा, शिमला मिर्च जैसी नकदी फसलों पर फोकस किया. ड्रिप इरिगेशन, समय पर खाद और सही बीज के चुनाव ने कमाल कर दिया. और आज नतीजा सबके सामने है. धमतरी के नगरी, बिरनपुर, सांकरा, सिहावा, कल्लेमेटा समेत कई जगहों पर उनकी 400 एकड़ में खेती होती है.

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जैविक खाद पर जोर देते हैं अरुण

यहां की सब्जियां रायपुर ही नहीं, यूपी, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक जाती हैं.अरुण की खेती की सबसे बड़ी खासियत है जुगाड़ और विज्ञान का संगम. वे रासायनिक दवाओं का कम इस्तेमाल करते हैं और वर्मीकम्पोस्ट व जैविक खाद पर जोर देते हैं. उन्होंने खुद ट्रैक्टर से चलने वाली ऑटोमेटिक स्प्रे मशीन बनाई है, जो चलते-चलते दवा का छिड़काव करती है. इससे मजदूरों का खर्च आधा हो गया और समय भी बचता है.

उन्होंने खेती को अब एक कंपनी की तरह चला रहे हैं. उनके फार्म पर 600 से ज्यादा ग्रामीणों को रोजगार मिला है और 100 लोगों की मैनेजर की टीम है जो अलग-अलग ब्लॉक संभालती है.अब अरुण खुद गुरु बन गए हैं. दूसरे राज्यों से किसान उनसे सीखने आते हैं. युवाओं को खेती से जोड़ने के लिए वे दीपावली के बाद नवंबर में एक बड़ी कार्यशाला करने जा रहे हैं, जिसमें आधुनिक खेती के गुर सिखाए जाएंगे.

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