रायपुर. छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रतीक्षा सूची में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है. शीर्ष अदालत ने राज्य शासन की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है. मामले में राज्य सरकार ने पूर्व में आए आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अब गृह और पुलिस विभाग को निर्धारित समय-सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
मामला छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल आरक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है. परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया था. नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद राज्य शासन की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी.
90 दिन में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पात्र प्रतीक्षा सूची वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन सहित आवश्यक प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी कर निर्धारित अवधि में नियुक्ति की कार्रवाई करनी होगी. इसके लिए 90 दिन की समय-सीमा तय की गई है. आदेश के बाद अब संबंधित विभाग के सामने दस्तावेज सत्यापन से लेकर पदस्थापना तक की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी है.
परसराम ध्रुव समेत अन्य की ओर से पैरवी
मामले में याचिकाकर्ता परसराम ध्रुव व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशिना आफरीन अली, अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड अभिजीत श्रीवास्तव और अंशुमन श्रीवास्तव ने पैरवी की. सुप्रीम कोर्ट के अभिलेखों में भी छत्तीसगढ़ राज्य बनाम परसराम ध्रुव एवं अन्य की विशेष अनुमति याचिका दर्ज है.
भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद
राज्य सरकार की याचिका खारिज होने के बाद प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है. अब संबंधित विभाग को आदेश के अनुरूप दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी. अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे थे.
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