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Ambikapur: जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर निकाला कैंडल मार्च, 24 सितंबर से OPD बंद की दी चेतावनी

Junior doctors' candlelight march

जूनियर डॉक्टरों का कैंडल मार्च

Ambikapur News: अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज परिसर में मंगलवार को जूनियर डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कैंडल मार्च निकाला. डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की. जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 24 सितंबर से ओपीडी सेवाएं बंद करने का फैसला लिया गया है.

17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

जूनियर डॉक्टर लंबे समय से छात्रवृत्ति बढ़ाने समेत 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इससे पहले भी मांगों को लेकर हड़ताल की गई थी. उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था. डॉक्टरों को उम्मीद थी कि तय समय में उनकी मांगों पर कार्रवाई होगी, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने के बाद एक बार फिर विरोध शुरू किया गया है.

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में उन्हें मिलने वाली छात्रवृत्ति कई अन्य राज्यों की तुलना में कम है. उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों पर काम का दबाव काफी अधिक रहता है. ऐसे में छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है.

स्वास्थ्य मंत्री ने मांगा था सात दिन का समय

दरअसल, छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को हाल ही में सात दिनों के लिए टाल दिया गया था. रविवार को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा की थी. इस दौरान मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए सात दिन का समय मांगा था.

आश्वासन के बाद भी विरोध जारी

स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद जे.डी.ए. ने तत्काल हड़ताल शुरू नहीं करने का निर्णय लिया था. इस दौरान डॉक्टरों ने अपनी नियमित ड्यूटी और मरीजों को दी जाने वाली चिकित्सा सेवाएं जारी रखने की बात कही थी. हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया था कि मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा.

इसी क्रम में जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकाला. इससे पहले ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट समेत कई अन्य शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम भी किए जा चुके हैं. डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशानी में डालना नहीं, बल्कि अपनी लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है.

मांग पूरी नहीं हुई तो आगे की रणनीति

जे.डी.ए. ने कहा है कि सरकार को दिए गए सात दिनों के समय में अगर मांगों पर ठोस निर्णय होता है तो आगे की स्थिति उसी के अनुसार तय की जाएगी. वहीं, मांगों का समाधान नहीं होने पर संगठन की जनरल बॉडी बैठक में आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा. जरूरत पड़ने पर 24 सितंबर से ओपीडी बंद करने और दोबारा अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

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