Surguja: खाद की कालाबाजारी पर कृषि विभाग की दिखावे की कार्यवाही, FIR नहीं, अब बिक्री की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
खाद की कालाबाजारी
Surguja: सरगुजा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हर खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ता है. यूरिया और डीएपी की कमी, निर्धारित कीमत से अधिक वसूली, खाद के साथ जबरन अन्य उत्पादों की टैगिंग और कालाबाजारी की शिकायतें लगभग हर साल सामने आती रही हैं. इन लगातार शिकायतों के बीच कृषि संचालनालय ने ऐसा आदेश जारी किया है, जो खुद इस बात का संकेत देता है कि विभाग को भी खाद वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियों की आशंका है.
कृषि संचालनालय, रायपुर ने 24 जून 2026 को सभी जिलों के उप संचालक कृषि को निर्देश जारी करते हुए 1 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक “उर्वरक विक्रय सतर्कता अभियान” चलाने के आदेश दिए हैं. इस अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक निजी उर्वरक विक्रय केंद्र पर कृषि विभाग के अधिकारी तैनात किए जाएंगे और सबसे अहम बात यह है कि हर दिन खाद बिक्री की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी.
अब खाद बिक्री की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
आदेश के मुताबिक, दुकानों में तैनात अधिकारी प्रतिदिन दुकान खुलने से पहले उपलब्ध स्टॉक की स्थिति, दिनभर किसानों की भीड़ और शाम को बचा हुआ स्टॉक मोबाइल से 2 से 3 मिनट का वीडियो बनाकर सुरक्षित रखेंगे. यदि किसी दुकान पर पहले से कालाबाजारी, विवाद या अनियमितता की शिकायत मिली है तो वहां केवल कुछ मिनट नहीं बल्कि पूरे दिन की बिक्री प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी. वीडियो में तारीख, समय और दुकान का नाम बोलकर रिकॉर्ड करना होगा ताकि भविष्य में यह साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सके.
आखिर वीडियो रिकॉर्डिंग की नौबत क्यों?
सरकारी आदेश कई सवाल भी खड़े करता है. यदि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होती तो हर दुकान पर वीडियो रिकॉर्डिंग की जरूरत क्यों पड़ती? इससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग को खुद इस बात का अंदेशा है कि खाद की बिक्री में कहीं न कहीं गड़बड़ी हो रही है. सरगुजा जिले में भी हर साल किसानों की लंबी कतारें, स्टॉक खत्म होने की शिकायतें, अधिक कीमत वसूली और यूरिया के साथ अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव जैसे आरोप लगते रहे हैं. कई बार किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की, लेकिन कार्रवाई सीमित ही रही.
अफसरों की भी होगी जवाबदेही
आदेश के अनुसार प्रत्येक निजी खाद दुकान पर कृषि विस्तार अधिकारी या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाएगी. अधिकारी प्रतिदिन दुकान खुलते ही भौतिक स्टॉक, POS मशीन के रिकॉर्ड और IFMS स्टॉक का मिलान करेंगे. यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलता है तो तत्काल पंचनामा बनाकर कार्रवाई की जाएगी.
इन चीजों को भी करना होगा सुनिश्चित
- केवल आधार आधारित बायोमेट्रिक PoS मशीन से ही खाद की बिक्री हो.
- किसान को अनिवार्य रूप से बिल दिया जाए.
- बिल में किसान का नाम, आधार के अंतिम चार अंक और मोबाइल नंबर दर्ज हो.
- दुकान पर उपलब्ध स्टॉक और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) का बोर्ड लगाया जाए.
- यूरिया के साथ जबरन जिंक, सूक्ष्म पोषक तत्व या अन्य उत्पादों की टैगिंग न की जाए.
उड़नदस्ता करेगा औचक निरीक्षण
कृषि संचालनालय ने प्रत्येक अनुविभाग में एसडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय उड़नदस्ता टीम बनाने के निर्देश दिए हैं. यह टीम प्रतिदिन कम से कम पांच खाद दुकानों का औचक निरीक्षण करेगी. निरीक्षण के दौरान स्टॉक की जांच के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच होगी. जिला मुख्यालय में सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक कंट्रोल रूम संचालित होगा और खाद लेकर आने-जाने वाले वाहनों की भी जांच की जाएगी.
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मिलीभगत मिली तो एफआईआर और लाइसेंस रद्द
आदेश में साफ कहा गया है कि यदि किसी विक्रेता या अधिकारी की मिलीभगत, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO)-1985 के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है और आवश्यक होने पर उसका स्टॉक भी सरकारी नियंत्रण में लिया जाएगा.