Airline Overbooked: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह खबर बेहद खास है. अगर आपके पास कन्फर्म टिकट है और आप समय पर एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं, तब भी एयरलाइन आपको फ्लाइट में बैठने से मना कर दे, तो आपके पास कानूनी कार्रवाई का अधिकार है. ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक जज ने एयरलाइन के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें 1 लाख रुपये का मुआवजा मिला.
मामला उस समय शुरू हुआ जब जज अपनी तय यात्रा के लिए समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचे. उनके पास कन्फर्म टिकट था और उन्होंने सभी जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली थीं. लेकिन, बोर्डिंग के समय एयरलाइन ने उन्हें यह कहकर फ्लाइट में बैठाने से इनकार कर दिया कि विमान में सीटें भर चुकी हैं. दरअसल, एयरलाइन ने जरूरत से ज्यादा टिकट बेच दिए थे, जिसे ओवरबुकिंग कहा जाता है.
जज को करना पड़ा था परेशानी का सामना
अचानक यात्रा रुक जाने से जज को काफी परेशानी हुई. जरूरी काम प्रभावित हुए और उन्हें मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा. इसके बाद उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि एयरलाइन की यह कार्रवाई यात्रियों के साथ उचित व्यवहार नहीं है. आयोग ने कहा कि जब किसी यात्री के पास वैध और कन्फर्म टिकट हो तथा वह समय पर एयरपोर्ट पहुंच गया हो, तब केवल ओवरबुकिंग का हवाला देकर उसे यात्रा से वंचित नहीं किया जा सकता. यह सेवा में कमी का मामला है.
आयोग ने एयरलाइन को दिया मुआवजा देने का आदेश
आयोग ने एयरलाइन को जज को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके साथ ही यह भी कहा कि एयरलाइंस को टिकट बेचते समय और यात्रियों को बोर्डिंग देने के मामले में पूरी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. यदि किसी यात्री को ओवरबुकिंग के कारण फ्लाइट में जगह नहीं मिलती है, तो उसके अधिकारों की रक्षा करना एयरलाइन की जिम्मेदारी है.
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