आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की तैयारी क्यों? क्‍या है पूरा मामला

Jauhar University Bulldozer Action: पूर्व मंत्री आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन की तैयारी कर ली है. कुल मिलाकर यह माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा सकता है.
जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान

जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान

bulldozers Action Jauhar University: उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्‍किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. भले ही वे पुराने मामलों में इस समय जेल में बंद हैं. लेकिन, जेल में होने के बाद भी बाह उनकी मुसीबतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. इन सब के बीच अब उनकी रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी चर्चा में बनी हुई है.

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने का आदेश जारी किया है. प्रशासन का कहना है कि इन भवनों का निर्माण तय नियमों के तहत स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया, इसलिए इन्हें अनधिकृत निर्माण माना गया है.

यदि तय समय में कार्रवाई नहीं की गई तो प्रशासन खुद बुलडोजर चलाकर इन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. मतलब यह कि आने वाले द‍िनों इस यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिल सकती है.

क्‍या है पूरे व‍िवाद की वजह?

यह विवाद केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है. पिछले कई सालों से जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन को लेकर भी कानूनी लड़ाई चल रही है. राज्य सरकार का आरोप है कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों, सरकारी विभागों और अन्य श्रेणियों की जमीन नियमों के विपरीत विश्वविद्यालय परिसर में शामिल की गई थी.

इसी विवाद के चलते कुछ जमीनों की लीज पहले ही रद्द की जा चुकी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था.

प्रशासन ने पूरे मामले को लेकर क्‍या कहा?

प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान केवल मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक ब्लॉक के निर्माण को ही स्वीकृत पाया गया, जबकि बाकी 38 इमारतों के लिए आवश्यक मंजूरी के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रबंधन का दावा है कि जिन भवनों का निर्माण हुआ, उस समय यह इलाका RDA के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था, इसलिए प्राधिकरण से अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी.

सालों बाद खुली आम लोगों के लिए सड़क

इस कार्रवाई के साथ प्रशासन ने यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली सड़क को भी सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है. कई सालों बाद मुख्य गेट आम लोगों के लिए खोल दिया गया. लोक निर्माण विभाग ने बोर्ड लगाकर साफ कर दिया कि यह रास्ता सार्वजनिक उपयोग के लिए है.

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