Akhilesh Yadav Support For Jauhar University: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थिति जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने की प्रशासन ने तैयारी कर ली है. कुल मिलाकर यह भी माना जा रहा है कि प्रशासन अब इसे गिराने की कार्रवाई किसी भी समय कर सकती है. अब इस पूरे मामले में तमाम राजनीतिक दल और नेता भी कूंद पड़े हैं. इसके साथ ही उन्होंने इसे बचाने के लिए भी मुहिम शुरू कर दी है.
प्रशासन की तरफ से दिए गए नोटिस में यूनिवर्सिटी प्रबंधन को केवल 15 दिन का समय दिया गया है. मतलब यह कि 15 दिनों में वहां से सामान हटाना होगा. अब इस पूरे मामले में सपा मुखिया अखिलेश यादव की एंट्री भी हो चुकी है. उन्होंने इस यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट की हैं. जिसमें उन्होंने छात्रों और उनके परिजनों के नाम खुला पत्र लिखा है.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रिय छात्रों और अभिभावकगण, जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं. बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे.
उन्होंने आगे लिखा कि इस दुर्भावनापूर्ण पक्षपाती फैसले के खिलाफ, हमारे साथ हमारा छोटे-से-छोटा कार्यकर्ता, समर्थक, बड़े-से-बड़ा नेता और वो सब हज़ारों बच्चे व उनके मेहनतकश माता-पिता भी हैं जिनके सपने पर बुलडोज़र चलाने की निकृष्ट कोशिश भाजपा सरकार कर रही है.
प्रिय छात्रों और अभिभावकगण,
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 19, 2026
जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की युवाओं और उनके अभिभावकों की मुहिम में, हम सब पूरी तरह से आपके साथ हैं।
बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे। इस दुर्भावनापूर्ण पक्षपाती फ़ैसले के…
विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर- अखिलेश
अखिलेश ने आगे लिखा कि हर विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है, हम ‘शिक्षा के मंदिर’ को बचाने के लिए देश भर से अपील करते हैं कि वो हमारे साथ आएं. विश्वविद्यालय में हर समाज के बच्चे पढ़ते हैं, क्या भाजपा अब हर समाज के युवाओं के विरुध्द हो गई है. भाजपा का अहंकार ही ये सब गलत काम करा रहा है. अगर कहीं कुछ काग़ज़ी कमी है भी तो उसके काग़ज़ पूरे करके यूनिवर्सिटी को बचाया जाए और स्टूडेंट्स के भविष्य को भी.
उन्होंने कहा कि यहां ग़रीबों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वो भाजपाइयों की तरह अपने बच्चों को महँगे विश्वविद्यालय या विदेशों में पढ़ा सकें. जिनके न परिवार हैं न बच्चे,वो परिवारवालों का दर्द क्या जानें. अगर भाजपा के मन में बच्चों, युवाओं, उनके परिवार-परिजनों व समाज के लिए रत्ती भर भी सहानुभूति होती तो वो ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी से भरी इस विध्वंसक कार्रवाई का तत्काल कोई विकल्प ढूंढती.
दूसरी पोस्ट में अखिलेश ने क्या लिखा?
अखिलेश यादव ने अपनी दूसरी पोस्ट में लिखा कि इस शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार चाहे तो बदले की भावना छोड़कर जौहर यूनिवर्सिटी का नक़्शा भी आसानी से एक दिन में पास करा सकती है.
आगे कहा कि भाजपा अपने लोगों के लिए इस शासनादेश को मानती है लेकिन किसी और के लिए इसे इस्तेमाल न करके हर समाज के छात्रों और उनके परिवारवालों के ख़िलाफ़ नाइंसाफ़ी कर रही है. इस जीओ के आधार पर ही भाजपा सरकार ने हज़ारों भवनों को नियमित करके, उन्हें वैध स्वरूप प्रदान किया है. भाजपा बहाना न बनाए, शिक्षा के मंदिर को बचाए! विद्वेष हारेगा, सौहार्द जीतेगा! ‘पक्षपात’ अन्याय का सबसे प्रत्यक्ष रूप होता है.
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