सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट से झटका! प्राइवेट अस्पताल भेजने की मांग ठुकराई, सरकार से 3 दिन में मांगी रिपोर्ट
वांगचुक को नहीं मिली हाईकोर्ट से राहत
sonam Wangchuk Delhi High Court: सोनम वांगचुक को फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है. उनकी पत्नी गीतांजलि एंगमो की तरफ से दायर याचिका पर विशेष सुनवाई करते हुए अदालत ने वांगचुक को तत्काल किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है.
पूरे मामले पर हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सरकारी अस्पताल से उन्हें हटाने का कोई कारण नहीं बनता है. इसके साथ ही केंद्र सरकार और अस्पताल प्रशासन को तीन दिन के भीतर डिटे स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.
गीतांजलि ने किस बात को लेकर लगाई थी याचिका?
गीतांजलि एंगमो की तरफ से लगाई गई याचिका में दावा किया गया कि सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है.
उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उन्हें प्रभावी रूप से अवैध हिरासत में रखा गया है, परिवार को पूरी मेडिकल जानकारी नहीं दी जा रही और निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है. याचिका में यह भी कहा गया कि अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है, जिससे परिवार और सहयोगियों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि पहली नजर में सरकार द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाने का फैसला मनमाना या गैरकानूनी नहीं दिखता है. अदालत ने माना कि लंबे अनशन के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सा निगरानी आवश्यक थी. इसलिए फिलहाल उन्हें सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता है.
सरकार और अस्पताल को क्या निर्देश दिए?
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट उनके परिवार के साथ साझा की जाएगी. इस पर अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया.
इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर विस्तृत जवाब और स्वास्थ्य संबंधी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी.
सफदरजंग अस्पताल में ही रहेंगे वांगचुक
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहेंगे. अदालत ने निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार किया है, लेकिन सरकार से विस्तृत जवाब और ताजा स्वास्थ्य रिपोर्ट मांगकर मामले की निगरानी जारी रखने का संकेत दिया है.
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