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सीजफायर के बीच भारत की कूटनीति! 6 खाड़ी देश आए एक साथ , होर्मुज संकट पर भी नजर, समझिए पूरा प्लान

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खाड़ी देशों को भरोसा दिला रहा भारत

दुनियाभर में इस समय माहौल तनावपूर्ण है. इसके पीछे की वजह मिडिल ईस्‍ट के मौजूदा हालात हैं. स्थायी शांति को लेकर एक तरफ जहां पाकिस्तान में शांति वार्ता हो रही है. तो वहीं दूसरी तरफ भारत ने भी एक अहम कूटनीतिक पहल करते हुए खाड़ी देशों के साथ अपने संपर्क तेज कर दिए हैं. इस पहल का मकसद न सिर्फ मौजूदा संकट से न‍िपटना है. बल्कि स्थायी शांति को मजबूत करना है.

भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के छह प्रमुख देशों सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ सक्रिय संवाद स्थापित किया है.  इस क्रम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन देशों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर भारत का स्पष्ट संदेश दिया कि संकट की घड़ी में भारत उनके साथ मजबूती से खड़ा है. किसी भी तरह की मदद को नहीं रोका जाएगा.

भारत ने खाड़ी देशों को भरोसा दिलाया है कि युद्ध जैसे हालात में यदि खाने-पीने की चीजों या जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित होती है, तो उसे सुचारू बनाए रखने में भारत हर संभव सहयोग करेगा.  यह पहल खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है.

युद्ध विराम को स्थायी बनाने की कोशिश

पीयूष गोयल ने जीसीसी के महासचिव जासेम मोहम्मद अल बुदैवी से वर्चुअल बातचीत के दौरान उम्मीद जताई कि मौजूदा सीजफायर आगे चलकर स्थायी शांति में बदलेगा.  उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना सभी देशों के हित में है. इसके अलावा उन्होंने यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे देशों के साथ अलग-अलग बातचीत कर हालात की समीक्षा की.

खाड़ी देशों से भारत के रिश्तों की अहमियत

भारत के लिए खाड़ी देश सिर्फ रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम हैं. भारत की तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है. इसके साथ ही, भारत और जीसीसी के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी चर्चा जारी है, जिससे व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. ईरान के नियंत्रण के कारण यहां से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर असर पड़ा है, जिससे न सिर्फ भारत बल्कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.  

सीजफायर की अनिश्चितता के बीच भारत ने खाड़ी देशों को साथ लेकर जो पहल की है, वह न सिर्फ उसकी कूटनीतिक ताकत दिखाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारत अब वैश्विक संकटों में एक निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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