India purchases S-400: भारत एक बार फिर रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. नई दिल्ली में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की शुक्रवार को बैठक आयोजित हुई. इसमें 2.38 लाख करोड़ रुपये के हथियार और विमान की खरीद के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है.
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक
शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की अहम बैठक हुई. इस बैठक में कई हथियार खरीदने के लिए मंजूरी मिली है. इसमें एस-400 मिसाइल सिस्टम के अलावा मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट और Su-30 भी शामिल है.
‘धनुष’ तोप प्रणाली की 300 इकाइयों को खरीदने की मंजूरी
बैठक में इंडियन एयर फोर्स के लिए एस-400 एयर डिफेंस सिस्टनम की 5 और स्क्वाड्रन खरीदने के लिए मंजूरी मिली है. एस-400 ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़ी भूमिका निभाई थी. एस-400 लगभग 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन को टारगेट करने में सक्षम है.
इसके अलावा स्वदेशी ‘धनुष’ तोप प्रणाली की 300 और इकाइयों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है. हालांकि भारतीय सेना के पास अभी 114 तोपें मौजूद हैं. जबकि टैंकों के लिए कवच-भेदी (आर्मर-पियर्सिंग) गोला-बारूद की खरीद की पहले ही मंजूरी मिल चुकी है.
इन हथियारों को मिली मंजूरी
बैठक में इंडियन आर्मी, एयरफोर्स के लिए हथियारों की खरीद के लिए मंजूरी दी गई है. इनमें एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, आर्मर-पियसिंग टैंक एम्युनिशन, हाई कैपेसिटी रेडियो रिले, धनुष गन सिस्टम शामिल हैं.
इसके अलावा धनुष गन सिस्टम सेना की आर्टिलरी क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे भारतीय सेना सभी तरह के इलाकों में लंबी दूरी तक पूरी सटीकता के साथ अपने निशाने पर भेद सकेगा.
भारत के दुश्मनों की टेंशन बढ़ी
एस-400 समेत अन्य हथियारों की खरीद से जहां भारतीय सेनाएं मंजबूत होंगी, वहीं भारत के हथियारों के खरीद की मंजूरी मिलने से चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है. खासतौर से पाकिस्तान एस-400 की खरीदारी से ज्यादा परेशान हो सकता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन गया था.
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